जामिया को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए मिली प्रतिष्ठित DHR ग्रांट

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) की मानव संसाधन विकास (HRD) योजना के “सपोर्ट टू इंस्टीट्यूशंस एंड साइंटिफिक प्रोफेशनल्स/ बॉडीज/ एसोसिएशंस” घटक के तहत जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) को एक प्रतिष्ठित ग्रांट मंज़ूर की गई है।
इस योजना के तहत, DHR चुने हुए घरेलू संस्थानों को खास प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उम्मीदवारों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने में सहायता देता है। जेएमआई को “मॉलिक्यूलर एंड मल्टी-ओमिक्स अप्रोचेस इन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR): डायग्नोस्टिक्स टू थेराप्यूटिक्स” शीर्षक वाले अपने प्रस्ताव के लिए पाँच साल की अवधि के लिए 67.23 लाख रुपये की बड़ी ग्रांट मिली है।
यह ग्रांट यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के महत्वपूर्ण क्षेत्र में बायोमेडिकल रिसर्च, वैज्ञानिक ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण को मज़बूत करने में काफी योगदान देगी। यह प्रोग्राम मॉलिक्यूलर और मल्टी-ओमिक्स अप्रोच में विशेष ट्रेनिंग देगा, जिसमें AMR डायग्नोस्टिक्स, मल्टी-ओमिक्स अप्रोच और इलाज की रणनीतियों के विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। यह पहल बायोमेडिकल साइंस के एक महत्वपूर्ण और तेज़ी से विकसित हो रहे क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करके भारत सरकार के स्किल इंडिया प्रोग्राम के उद्देश्यों में भी योगदान देगी।
इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डॉ. शमा परवीन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के सेंटर फॉर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन बेसिक साइंसेज (CIRBSc) में प्रोफेसर हैं। प्रो. परवीन का रिसर्च प्रोफ़ाइल मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, वायरोलॉजी, संक्रामक रोगों और ट्रांसलेशनल बायोमेडिकल रिसर्च को कवर करता है। प्रो. परवीन ने DBT, CSIR, DST, UGC और CCRUM-AYUSH सहित कई फंडिंग एजेंसियों से रिसर्च प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। प्रो. परवीन ने रिसर्च ट्रेनिंग, मेंटरशिप के साथ-साथ एकेडमिक इवेंट्स, कॉन्फ्रेंस और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप के आयोजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मंजूर किए गए प्रपोज़ल के सह-अन्वेषक (Co-Investigators) जेएमआई के CIRBSc से प्रो. इम्तियाज़ हसन, प्रो. आसिमुल इस्लाम, प्रो. एस. एन. काज़िम और प्रो. राजन पटेल हैं। उनकी मिली-जुली विशेषज्ञता इस प्रोग्राम के इंटरडिसिप्लिनरी (कई विषयों को जोड़ने वाले) स्वरूप को और मज़बूत करेगी और AMR रिसर्च में एडवांस्ड ट्रेनिंग को आसान बनाएगी, जिसमें मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, कंप्यूटेशनल तरीके, ड्रग डिस्कवरी आदि शामिल हैं।
इस पहल से AMR रिसर्च में जेएमआई का योगदान बढ़ने और इंटरडिसिप्लिनरी वैज्ञानिक ट्रेनिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे ऐसे कुशल रिसर्चर और प्रोफेशनल तैयार करने में मदद मिलेगी जो एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की बढ़ती वैश्विक चुनौती से निपटने में सक्षम हों।
जेएमआई के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने प्रो. शमा परवीन और उनकी टीम को इस बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के क्षेत्र में रिसर्च को आगे बढ़ाने और क्षमता निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल जेएमआई की रिसर्च प्रोफ़ाइल और बायोमेडिकल साइंस में उभरती चुनौतियों से निपटने में इसके योगदान को और बेहतर बनाएगी। यूनिवर्सिटी इस प्रतिष्ठित DHR ग्रांट को अत्याधुनिक बायोमेडिकल रिसर्च को आगे बढ़ाने, इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग को मज़बूत करने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के क्षेत्र में एक मज़बूत रिसर्च और ट्रेनिंग इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानती है।



