पूर्व शिक्षा मंत्री ने भारत की शिक्षा प्रणाली में तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और सभ्यतागत ज्ञान परंपराओं का मेल होना चाहिए

शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या 'विकसित भारत शिक्षक सम्मान 2026' सम्मानित किया पूर्व राज्यपाल प्रो जगदीश मुखी ने

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की वकालत की जो नवाचार और तकनीक को अपनाते हुए मानवीय विकास, मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को प्राथमिकता दे। डॉ. निशंक ने नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ (नमो अध्ययन केन्द्र) द्वारा आयोजित और डीएआईसी के सहयोग से ‘नमो विकसित भारत संवाद’ सीरीज़ के एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “मशीन मत बनाओ, इंसान बनाओ। यह इस नई शिक्षा नीति की पहली शर्त है।”

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: भारत में समावेशी, अभिनव, भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा और जेन ज़ी  को सशक्त बनाना” विषय पर बोलते हुए, उन्होंने भारतीय भाषाओं में सीखने और देश की भाषाई विविधता का सम्मान करने के महत्व पर ज़ोर दिया। डॉ. निशंक ने कहा, “अपनी प्राथमिक शिक्षा अपनी भाषा में करें। तमिलनाडु में तमिल में करें। केरल में मलयालम में करें।”

डॉ. निशंक ने औपनिवेशिक शिक्षा की विरासत से आगे बढ़ने और सीखने की प्रक्रिया को भारत की बौद्धिक और ज्ञान परंपराओं से फिर से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती अंका वर्मा ने कहा कि एनईपी 2020 एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है जो आधुनिक और तकनीकी-सक्षम है, साथ ही भारत की सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ी हुई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि किसी राष्ट्र की ताकत काफी हद तक उसकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने भारत के उभरते शैक्षिक दृष्टिकोण में जेन ज़ेड की रचनात्मकता और आकांक्षाओं को शामिल करने का आह्वान किया। शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या शिक्षण और राष्ट्र-निर्माण में योगदान के लिए दस शिक्षकों को ‘विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार 2026’ सम्मानित किया

नमो अध्ययन केन्द्र के सभापति प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि इस पहल ने एन ई पी 2020, भारतीय ज्ञान प्रणालियों और जेन ज़ी युवाओं को एक साथ लाया है, और इस बात पर ज़ोर दिया कि शैक्षिक बदलाव में शिक्षक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तीन सत्र वाली इन वर्कशॉप में शिक्षाविदों और एकेडमिक्स ने चर्चा की। इनमें प्रो. लवली शर्मा, प्रो. पायल कंवर चंदेल, प्रो. रमन चड्ढा, डॉ. सैयद महरुल हसन, डॉ. श्रीदेवी कल्याण, प्रो. दिव्या तंवर, डॉ. आमना मिर्जा,  डॉक्टर जावेद रहमानी और डीएआईसी के डायरेक्टर कर्नल आकाश पाटिल शामिल थे।

सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज इंटर्न ने टेक्नोलॉजी, स्किल्स, इनोवेशन और शिक्षा के भविष्य पर अपने विचार भी साझा किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में तुषिता भंडारी, सविता, आसना, नदीम वारिस खान, एड एम एन खान, खुशी मखीजा एवं डॉक्टर दौलत राम ने मुख्यरूप से सहयोग किया।

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