एएमयू के विभिन्न विभागों और संस्थानों में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के साथ हिंदी दिवस मनाया गया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 14 सितंबर को विभिन्न विभागों और संस्थानों की ओर से सांस्कृतिक, साहित्यिक और रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ हिंदी दिवस मनाया गया। कार्यक्रमों में हिंदी को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, सामाजिक जुड़ाव और रोजमर्रा के संवाद की भाषा के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। साथ ही भाषाई विविधता के सम्मान के साथ शिक्षा, कार्य और सार्वजनिक जीवन में हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग का संदेश दिया गया।

बेगम अजीजुन निसा हॉल में प्रो. असिया सुल्ताना के मार्गदर्शन में अंतर-हॉल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें तात्कालिक भाषण, विज्ञापन अभिनय और लघु नाटक प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी में अपनी रचनात्मकता और विचार व्यक्त करने का अवसर मिला।

प्रो. आसिया सुल्ताना ने कहा कि हिंदी संस्कृति, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने छात्राओं से हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने और रचनात्मक कार्यों में इसका अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया।

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में फरहाना ने प्रथम, शाइस्ता रहमान ने द्वितीय और उम्मे सलमा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि शगुफ्ता और अल्पना को सांत्वना पुरस्कार मिला। विज्ञापन अभिनय प्रतियोगिता में शाइस्ता रहमान प्रथम, अल्पना द्वितीय और फरिया शकील तृतीय रहीं। अरीबा अकील को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। लघु नाटक प्रतियोगिता में अक्षरधारा टीम ने ‘मैं हिंदी हूं: एक लेखक की कलम का संघर्ष’ नाटक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। शाइस्ता रहमान की टीम ने ‘बारातियों का स्वागत कौन करेगा?’ और अल्पना की टीम ने ‘मंत्र कहानी’ प्रस्तुत कर क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।

निर्णायक मंडल में महिला अध्ययन उन्नत केंद्र एवं विद्यार्थी कल्याण की सहायक अधिष्ठाता डॉ. जुही गुप्ता तथा वीमेन्स कॉलेज की डॉ. शगुफ्ता नियाज शामिल रहीं। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, प्रस्तुति, रचनात्मकता, भाषा और अभिव्यक्ति के आधार पर किया गया।

कार्यक्रम में हॉल की वार्डन डॉ. अफसाना, डॉ. मुजाहिद, डॉ. मुशीर, डॉ. इरम और डॉ. यास्मीन सहित बड़ी संख्या में छात्रायें उपस्थित रहे। डॉ. ज्योति कुसुम्बल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। पीएचडी शोधार्थियों असिया अमरीन, शाइस्ता रहमान और सलमा ने आयोजन में सहयोग किया।

राष्ट्रीय सेवा योजना में हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने हिंदी की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा विभाग की प्रो. नसरीन ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी को मातृभाषा के रूप में प्रेम और सम्मान दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ दूसरी भाषाओं का सम्मान भी जरूरी है। भाषा लोगों के दिलों को जोड़ने और विभिन्न समाजों एवं संस्कृतियों के बीच आपसी समझ बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने हिंदी को शिक्षा के साथ रोजगार, तकनीक और नए अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

मुख्य अतिथि राजा महेंद्र प्रताप सिटी स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. मोहम्मद फैयाजुद्दीन ने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी को याद करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका वास्तविक महत्व हिंदी को रोजमर्रा के जीवन, शिक्षा और कार्य में अपनाने में है।

विशेष अतिथि जिम्नेजियम प्रशिक्षक मजहर-उल-कमर ने राष्ट्रीय सेवा योजना की पहल की सराहना की। उन्होंने शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में हिंदी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नाहिद अकबरी ने किया। उन्होंने युवाओं में भाषा, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. मोहम्मद मोहसिन खान ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट कर स्वागत किया।

हिंदी दिवस के अवसर पर अतिथियों ने संयुक्त रूप से अमरूद का पौधा भी लगाया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में सैकड़ों राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्यों के अलावा मोहम्मद नईम, मोहम्मद इमरान खान, डॉ. आफताब अहमद अंसारी और अन्य शिक्षाविद शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन एएमयू तराना और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

एएमयू एबीके गल्र्स स्कूल में प्राथमिक और वरिष्ठ वर्ग की शिक्षिकाओं की विशेष बैठक के साथ हिंदी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डॉ. फरहत परवीन ने किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, भावनाओं और सामाजिक जुड़ाव की अभिव्यक्ति भी है।

उप-प्रधानाचार्या डॉ. सबा हसन ने भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन में हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कक्षाओं के अलावा कार्यालयी कार्य और दैनिक जीवन में भी हिंदी के अधिक प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने भाषा को बढ़ावा देने, संरक्षित रखने और समृद्ध बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

हिंदी शिक्षकों मोहम्मद अरशद खान और शकीला ने भी हिंदी की समृद्धि, उपयोगिता और वर्तमान महत्व पर विचार रखे। मोहम्मद अरशद खान ने बताया कि विद्यालय में 16 से 26 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा मनाया जाएगा। इस दौरान कविता पाठ, समाचार पत्र वाचन, पोस्टर निर्माण और निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम में वाणिज्य शिक्षिका मेहताब ने अपनी स्वरचित हिंदी कविता प्रस्तुत की, जिसे शिक्षकों ने सराहा। सिम्मी शाहिद और रिजवाना खातून ने प्रचार एवं अन्य व्यवस्थाएं संभालीं। शकीला ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

एएमयू के अब्दुल्ला स्कूल में कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए ‘हिंदी हमारी पहचान है’ और ‘मेरी प्यारी हिंदी भाषा’ विषयों पर पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने हिंदी लेखन, रंगों और छोटे-छोटे नारों के माध्यम से हिंदी के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त किया।

विद्यालय में विशेष प्रार्थना सभा भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने मातृभाषा और पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में हिंदी पर भाषण और कविताएं प्रस्तुत कीं। अधीक्षिका उमरा जहीर ने विद्यार्थियों को हिंदी पर गर्व करने तथा बोलने और लिखने में इसका सम्मानपूर्वक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं प्रयासों की सराहना की।

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