एएमयू वीमेन्स कालिज कॉलेज में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला व्याख्यानमाला का शुभारंभ

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वीमेन्स कालिज में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला व्याख्यानमाला का शुभारंभ ‘पितृसत्ता से संवाद और उसका प्रतिवादः शेख अब्दुल्ला और वीमेन्स कालिज ’ विषय पर व्याख्यान के साथ हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर फरहत हसन ने व्याख्यान दिया।
प्रो. हसन ने अपने व्याख्यान में उन्नीसवीं सदी के औपनिवेशिक भारत की सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया। उन्होंने महिला शिक्षा के उद्देश्यों और पितृसत्तात्मक व्यवस्था से उसके संबंधों पर चर्चा करते हुए बताया कि उस दौर में महिला शिक्षा का उद्देश्य अक्सर मौजूदा घरेलू व्यवस्था को बनाए रखना और उसे बेहतर बनाना होता था।
राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और अन्य समाज सुधारकों के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि शैक्षणिक पहलें कभी-कभी सामाजिक अभिजात वर्ग के प्रभुत्व को भी मजबूत कर सकती थीं। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने अपना प्रभाव केवल बल प्रयोग से ही नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से भी स्थापित करने का प्रयास किया।
उन्होंने उन्नीसवीं सदी में महिला शिक्षा से जुड़ी उन अवधारणाओं पर भी प्रकाश डाला, जिनमें प्रेम, भावनाओं और व्यापक पारिवारिक संबंधों को शामिल करते हुए परिवार तथा घरेलू जीवन को नए सिरे से व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया। व्याख्यान में राष्ट्र, राष्ट्रवाद और भारत की पितृसत्तात्मक संस्थाओं के बीच संबंधों की भी पड़ताल की गई।
इससे पहले, वीमेन्स कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रो. शगुफ्ता इम्तियाज ने वक्ता और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए महिला शिक्षा में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और बेगम वहीद जहां के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने प्रो. हसन का परिचय देते हुए उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध प्रकाशनों की जानकारी भी दी।
वीमेन्स कॉलेज की प्रो. रूमाना सिद्दीकी ने समापन टिप्पणी में भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में शेख अब्दुल्ला के योगदान पर विचार व्यक्त किए। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों ने व्याख्यान में उठाए गए मुद्दों पर वक्ता के साथ संवाद किया।
डॉ. फौजिया फरीदी ने कार्यक्रम का संचालन किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।



