नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र ने केंद्रीय शिक्षामंत्री से विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में ‘मन की बात’ को पाठ्यक्रमों में शामिल करने के लिए पत्र लिखा

'मन की बात' को पाठ्यक्रमों में विषय के रूप में हो, शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नमो केन्द्र ने "आग्रह पत्र" भेजा

टीएनएन समाचार : नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र (नमो केंद्र) ने केंद्रीय शिक्षामंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी को एक पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मन की बात को एक विषय के रूप में पाठ्यक्रमों में शामिल करने का अनुरोध किया है। शिक्षामंत्री को संबोधित पत्र में, नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आकाशवाणी द्वारा प्रसारित रेडियो कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया, जिसने सफलतापूर्वक 125 से अधिक एपिसोड पूरे कर लिए हैं।
नरेन्द्र मोदी अध्ययन केंद्र के पत्र में कहा गया है, “मन की बात का यह कार्यक्रम प्रेरणा, प्रोत्साहन और राष्ट्र निर्माण के विचारों का स्रोत रहा है। इसमें सामाजिक सुधार, युवा सशक्तिकरण, नवाचार, आत्मनिर्भरत भारत और भारत की सांस्कृतिक विरासत सहित कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।”
विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र ने केंदीय शिक्षा मंत्रालय से उच्च शिक्षा एवं स्कूली शिक्षा में मन की बात को अनिवार्य विषय बनाने का आग्रह किया है। अनुरोध प्रस्ताव में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि “इस विषय का अध्ययन छात्रों को दृढ़ संकल्प और सफलता के वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।”
 नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का हवाला देते हुए, पत्र में आगे जोर दिया गया, “हम उच्च शिक्षा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का उद्बोधन मन की बात को अनिवार्य विषय बनाने की दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं। इससे छात्रों को भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व की भूमिका के बारे में गहन जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।” 
नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र का मानना ​​है कि मन की बात को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों में मूल्य-आधारित शिक्षा का संचार होगा और उनमें जिम्मेदारी और उद्देश्य की भावना का पोषण होगा। पत्र में एक मजबूत अपील के साथ निष्कर्ष निकाला गया, “हम एक बार फिर आपसे अनुरोध करते हैं कि यूजीसी के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मन की बात को एक विषय के रूप में पेश करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि उच्च शिक्षा एवं स्कूली शिक्षा में इसका एकीकरण सुनिश्चित हो सके।”

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