अमूटा ने विश्वभारती और जादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा की घटनाओं की निंदा की
अलीगढ़, 3 सितंबर (मोहम्मद कामरान)
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (अमूटा) ने विश्वभारती विश्वविद्यालय और जादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा, धमकी और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने संबंधित अधिकारियों से विश्वविद्यालय परिसरों को शिक्षण, शोध और लोकतांत्रिक संवाद के लिए सुरक्षित बनाए रखने की मांग की है।
अमूटा ने कहा कि विश्वविद्यालयों में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और छात्रों, शिक्षकों, प्रशासन या विभिन्न संगठनों के बीच मतभेदों का समाधान संवाद और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने दोनों विश्वविद्यालयों की घटनाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की।
अमूटा ने केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संघों के महासंघ (फेडकुटा) की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर नंदिता नारायण को भाजपा के एक आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल द्वारा “दिमागी नक्सल” कहे जाने की भी कड़ी आलोचना की। एसोसिएशन ने इस तरह की भाषा को अपमानजनक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि शिक्षकों और शिक्षाविदों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय रखने और नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार है।
एसोसिएशन ने प्रोफेसर नंदिता नारायण के समर्थन में आवाज उठाने वाले शिक्षक संगठनों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि असहमति का जवाब तथ्यों, तर्क और बहस से दिया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों या आपत्तिजनक राजनीतिक शब्दों के माध्यम से।
अमूटा ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होने चाहिए जहां छात्र और शिक्षक स्वतंत्र रूप से सोच सकें, बिना भय के सवाल उठा सकें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति व्यक्त कर सकें।
अमूटा के अध्यक्ष प्रोफेसर तुफैल अहमद, मानद सचिव डॉ. अशरफ मतीन और संयुक्त सचिव डॉ. जमी़ल अहमद ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्वविद्यालयों को हिंसा, भय और राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों को स्वतंत्र रूप से सोचने, सवाल उठाने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतभेद और असहमति का जवाब हिंसा, धमकी या राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि तर्क, संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों से दिया जाना चाहिए।




