जटिल दवाओं के निर्माण में मददगार नई विधि एएमयू के शोधकर्ताओं ने विकसित की

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने ऐसे जटिल रासायनिक पदार्थ बनाने की एक नई और पर्यावरण के लिए सुरक्षित विधि विकसित की है, जो भविष्य में नई दवाओं की खोज में काम आ सकती है। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शोध जर्नल ऑर्गेनिक लेटर्स में प्रकाशित किया गया है। शोध टीम के अनुसार, इस जर्नल में एएमयू का यह पहला शोध प्रकाशन है।

यह शोध एएमयू के रसायन विज्ञान विभाग की ग्रीन केमिस्ट्री प्रयोगशाला में शोधार्थी निदा खान ने प्रो. जेबा एन. सिद्दीकी के निर्देशन में किया।

शोधकर्ताओं ने ऐसी नई विधि तैयार की है, जिसमें तीन अलग-अलग रासायनिक पदार्थों को एक ही पात्र में मिलाकर नया यौगिक तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में एसीटिक एसिड और एथेनॉल का इस्तेमाल किया गया। माइक्रोवेव की मदद से यह प्रक्रिया करीब एक घंटे में पूरी हो जाती है।

इस विधि से तीन अलग-अलग प्रकार के 25 नए यौगिक तैयार किए गए और इनमें अधिकतम 84 प्रतिशत तक सफलता मिली। खास बात यह है कि इन्हें तैयार करने के बाद अलग से कठिन और लंबी शुद्धिकरण प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। इससे रसायनों और समय दोनों की बचत होती है और पूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस विधि से तैयार किए गए यौगिक भविष्य में नई दवाओं की खोज के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इनमें ऐसे रासायनिक हिस्से शामिल हैं, जो प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले महत्वपूर्ण पदार्थों से प्रेरित हैं। इन अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर अधिक जटिल संरचना वाले नए यौगिक तैयार किए गए हैं।

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने कई परीक्षण किए और यह भी पता लगाया कि इस रासायनिक प्रक्रिया के दौरान एसीटिल इंडेनोपाइरोल नामक पदार्थ एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका निभाता है। कुछ तैयार किए गए यौगिकों की संरचना की पुष्टि विशेष एक्स-रे जांच के माध्यम से भी की गई।

प्रो. जेबा एन. सिद्दीकी ने शोधार्थी निदा खान के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि निदा ने प्रयोग करने, तैयार किए गए यौगिकों की जांच, आंकड़ों का अध्ययन और शोध पत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह शोध ऑर्गेनिक लेटर्स के वर्ष 2026 के खंड 28, अंक 17 में पृष्ठ 5626 से 5631 पर प्रकाशित हुआ है। शोध टीम के अनुसार, यह एएमयू के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे यह साबित होता है कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण और उपयोगी शोध कर रहे हैं।

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