एएमयू के मनोविज्ञान विभाग में तनाव और आघात से मुक्ति के उपायों पर कार्यशाला

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने विभाग परिसर में “तनाव और आघात से मुक्ति की चिकित्साः शरीर में संचित तनाव को समझना और दूर करना” विषय पर एक संवादात्मक शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में शरीर आधारित तरीकों के माध्यम से आघात से संबंधित तनाव को समझने और नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की गई।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, जिनमें चिंता, अवसाद तथा पढ़ाई और छात्रावास से जुड़ा तनाव शामिल है, पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने समय पर परामर्श और आत्महत्या रोकथाम से संबंधित पहलों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करने की जरूरत बताई और मनोविज्ञान के विद्यार्थियों से ध्यानपूर्वक सुनने, परामर्श देने और भावनाओं को नियंत्रित करने जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
तकनीकी और व्यावहारिक सत्र अरब अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ फिलिस्तीन के स्वास्थ्य विज्ञान विभाग, संबद्ध चिकित्सा विज्ञान संकाय के नैदानिक स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिक और एएमयू के पूर्व छात्र डॉ. वाएल मुस्तफा फाएज अबूहसन ने संचालित किया।
डॉ. अबूहसन ने प्रतिभागियों को तनाव एवं आघात से मुक्ति संबंधी अभ्यासों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह शरीर आधारित तरीका डॉ. डेविड बरसेली द्वारा विकसित किया गया है और नियंत्रित शारीरिक अभ्यासों तथा शरीर में होने वाले प्राकृतिक कंपन के माध्यम से मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र में जमा तनाव को कम करने का प्रयास करता है। उन्होंने मनोवैज्ञानिक अनुभवों और शारीरिक प्रतिक्रियाओं के बीच संबंध पर भी चर्चा की।
कार्यशाला में सात चरणों वाले इन अभ्यासों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। इसमें टखने और पैरों की हल्की गतिविधियां, खिंचाव, आगे की ओर झुकना, कमर और रीढ़ से संबंधित गतिविधियां, दीवार के सहारे बैठने का अभ्यास तथा पीठ के बल लेटकर पैरों को मोड़ने की मुद्रा शामिल थी। प्रतिभागियों ने सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण में इन अभ्यासों में भाग लिया। इस दौरान स्वयं को नियंत्रित रखने और सुरक्षित तरीके से अभ्यास करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय कार्यों में शरीर आधारित तरीकों के उपयोग को लेकर प्रतिभागियों के साथ विस्तृत संवाद हुआ।
कार्यक्रम की मेजबानी एम.ए. मनोविज्ञान की छात्रा अलीजेह लालपुरी ने की, जबकि बी.ए. मनोविज्ञान की छात्रा कामिना बेग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



