एएमयू में चुनावों की मांग तेज, AMUTA ने लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की उठाई आवाज

अलीगढ़, 03 अक्टूबर (मोहम्मद कामरान)
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की निर्वाचित प्रतिनिधित्व व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर एएमयू टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एसोसिएशन के सचिव डॉ. अशरफ मतीन, संयुक्त सचिव डॉ. जमील अहमद और अन्य शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाओं के चुनाव कराने की मांग उठाई।
डॉ. अशरफ मतीन और डॉ. जमील अहमद ने कहा कि एएमयू कोर्ट और अकादमिक काउंसिल में लंबे समय से शिक्षकों की निर्वाचित प्रतिनिधित्व व्यवस्था नहीं है, जबकि करीब चार महीने से एग्जीक्यूटिव काउंसिल में भी कोई निर्वाचित शिक्षक प्रतिनिधि नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ के चुनाव भी करीब आठ वर्षों से नहीं हुए हैं और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की यूनियन व एसोसिएशन भी सक्रिय नहीं है।
उन्होंने बताया कि 28 सितंबर को शिक्षकों की बैठक में कुलपति से मुलाकात के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया गया था। प्रशासन ने शनिवार शाम पांच बजे AMUTA पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों को बैठक के लिए बुलाया। डॉ. मतीन ने कहा कि शिक्षकों ने अपना प्रतिनिधिमंडल पहले ही तय कर लिया था, इसलिए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का चयन प्रशासन की ओर से किया जाना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए बुलाए जाने को सकारात्मक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव नहीं कराए गए तो शिक्षक विभाग-दर-विभाग अपने साथियों से संपर्क करेंगे और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक किसी नए अधिकार या सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के एक्ट और स्टैच्यूट्स में पहले से दर्ज अधिकारों और निर्वाचित प्रतिनिधित्व की बहाली की मांग कर रहे हैं।
AMUTA के संयुक्त सचिव डॉ. जमील अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाओं में शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की आवाज और प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब सभी संबंधित संस्थाओं के चुनाव समय पर कराए जाएं।
डॉ. मुसव्विर ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी एएमयू के संविधान और नियमों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण वैधानिक संस्थाओं के चुनाव लंबे समय से नहीं कराए जा रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय के एक्ट और स्टैच्यूट्स के अनुसार इन संस्थाओं का सक्रिय रहना और उनमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब इन संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधित्व ही नहीं होगा तो विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे मजबूत होगी।
डॉ. मुराद अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी वैधानिक निकायों में शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। यदि हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं तो विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि एएमयू में भी लोकसभा और विधानसभा की तरह तथा देश के अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर चुनाव कराए जाने चाहिए, ताकि सभी वर्गों को अपनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था मिल सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रोफेसर मोइनुद्दीन, डॉ. इशाअत मोहम्मद खान, डॉ. अरशद बारी, डॉ. मुजम्मिल मुश्ताक, डॉ. साद बिन जावेद, डॉ. आसिम खान, डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती, डॉ. मोहम्मद सुहैल, डॉ. अरशद एच. खान और डॉ. शमशाद समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने एएमयू कोर्ट, अकादमिक काउंसिल और अन्य वैधानिक संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधित्व बहाल करने के साथ छात्रसंघ तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की यूनियन व एसोसिएशन के चुनाव कराने की मांग दोहराई।



