शैक्षिक अध्ययन विभाग, शिक्षा संकाय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत हिंदी दिवस समारोह

 शैक्षिक अध्ययन विभाग, शिक्षा संकाय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया द्वारा हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत ‘हिंदी भाषा: नए क्षितिज और चुनौतियाँ’ विषय पर एक विशेष शैक्षणिक एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप, उसकी संभावनाओं, बदलते भाषायी परिदृश्य तथा समकालीन समय में उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए एक सार्थक अकादमिक मंच उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम ने विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार, संवेदनाएँ और अकादमिक दृष्टिकोण साझा करने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रो. अनीता रस्तोगी, अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एज़ाज मसीह, विभागाध्यक्ष, शैक्षिक अध्ययन विभाग ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. रहमान मुसव्विर, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया थे।

कार्यक्रम का आरंभ मुहम्मद बिलाल के द्वारा कुरान की तिलावत से किया गया। कार्यक्रम संयोजक प्रो. हरजीत कौर भाटिया ने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि का स्वागत एवं उनका पूर्ण परिचय प्रस्तुत किया। प्रो. भाटिया ने हिन्दी भाषा को केवल संप्रेषण के माध्यम के रूप में देखने के बजाय उसे ज्ञान, संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक जुड़ाव और राष्ट्रीय जीवन की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति के रूप में देखने कि आवश्यकता पर बल दिया।

विभाग के हिन्दी प्रभारी डॉ. सज्जाद अहमद ने अपने उदबोधन में हिन्दी और हिन्दुस्तानी भाषा के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने विवेचनापूर्ण भाषण में हिन्दी भाषा के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर चर्चा करते हुए कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए। विशेष रूप से हिन्दी भाषा को युवा पीढ़ी की धरोहर बनाने पर बल दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. रहमान मुसव्विर की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष अकादमिक महत्त्व प्रदान किया। हिंदी भाषा के क्षेत्र में उनके अनुभव और विशेषज्ञता ने प्रतिभागियों को हिंदी के समकालीन स्वरूप और उसकी संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। विषय की प्रासंगिकता ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच विशेष रुचि उत्पन्न की तथा हिंदी भाषा को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की संभावनाओं पर चिंतन का वातावरण निर्मित किया। अपने भाषण “हिंदी भाषा: नए क्षितिज और चुनौतियाँ” पर विचार प्रस्तुत करते हुए प्रो. मुसव्विर ने कहा कि आज हिंदी एक ओर शिक्षा, साहित्य, मीडिया, संचार, डिजिटल माध्यमों और सामाजिक जीवन में निरंतर विस्तार कर रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन, बहुभाषिकता, बदलते संचार माध्यमों और नई पीढ़ी की भाषायी आवश्यकताओं के कारण उसके सामने अनेक नई चुनौतियाँ भी उपस्थित हैं।

विभागाध्यक्ष प्रो. एज़ाज मसीह ने कार्यक्रम के शैक्षणिक एवं रचनात्मक पक्ष को प्रोत्साहित किया तथा विद्यार्थियों को भाषा के प्रति रुचि, संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि हिन्दी इस समय संयुक्त राष्ट्र संगठन की छः महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है तथा संसार की पाँचवीं सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिन्दी भाषा को शिक्षा और अनुसंधान की भाषा बनाने का हमें प्रयास करना होगा। इस के लिए गांधी जी और मौलाना अबुल कलाम आजाद के विचारों के अनुरूप हिन्दी का प्रयोग हिन्दुस्तानी भाषा के तौर पर करना चाहिए।

कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। साथ ही, विभिन्न  संकायों के छात्रों एवं शोधार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक अकादमिक स्वरूप प्रदान किया।

अनमता इरफान ने सभी अतिथियों, आयोजकों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। डॉ. अफाक़ नदीम खान, एसोसिएट प्रोफेसर एवं सलाहकार, पी.जी.ई.ए., के आह्वान पर कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ किया गया। 

अनुष्का अग्रवाल ने मंच संचालन बहुत आकर्षक तरीके से किया। कार्यक्रम के आयोजन में पी.जी.ई.ए. के विद्यार्थियों की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। मोहम्मद हम्माद, सुकृति गुप्ता, अंजना खत्री, आतिफ रहमान, नुजहत खान, मुहम्मद अजिम और अनुष्का अग्रवाल सहित सभी आयोजक विद्यार्थियों ने कार्यक्रम की तैयारी, समन्वय और व्यवस्थाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के छात्र समन्वयकों—परवीन खातून, शाहगुलाब तथा ज़िक्ऱा ने आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय सहयोग दिया। 

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