एएमयू में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ, हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बनाने पर जोर
अलीगढ़, 14 सितंबर (मोहम्मद कामरान): राजभाषा (हिंदी) कार्यान्वयन समिति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आर्ट्स फैकल्टी लाउंज में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी पखवाड़े (14 से 26 सितंबर) की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, इसके व्यापक उपयोग और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने हिंदी भाषा के महत्व और इसके प्रयोग पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सबसे बड़ी संपर्क भाषाओं में से एक है। हिंदी दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और सभ्यता को अभिव्यक्त करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अपनी मातृभाषा के इस्तेमाल में किसी तरह की झिझक या हीन भावना नहीं होनी चाहिए।
कुलपति ने कहा कि हिंदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की भाषा के रूप में लगातार विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार प्रदर्शित कर रहा है।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भाषाविद् प्रोफेसर वीआर जगन्नाथन ने कहा कि भारत की विभिन्न भाषाई विशेषताओं के बावजूद हिंदी एक मजबूत भारतीय पहचान का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि भारत के सामने मुख्य चुनौती वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी से मुकाबला करना नहीं, बल्कि भारतीय कार्यक्षेत्रों में अपनी भाषाओं को उचित स्थान दिलाना है।
उन्होंने कहा कि राजभाषा का अर्थ केवल औपचारिक पत्राचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान-विज्ञान, उच्च तकनीक और सरकार के प्रत्येक मंत्रालय की प्रमुख कार्यालयी भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में भाषा नीति राजनीतिक हितों से ऊपर होनी चाहिए और इसमें भाषाविदों, शिक्षाविदों तथा साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि एवं फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के डीन प्रोफेसर रिजवान खान ने दैनिक कामकाज और तकनीक में राजभाषा की स्थिति पर विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक सूचना तकनीक और डिजिटल माध्यमों में हिंदी के उपयोग को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भाषाई स्तर पर औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर ही हिंदी को उसका वास्तविक सम्मान दिलाया जा सकता है।

राजभाषा (हिंदी) कार्यान्वयन समिति के सचिव एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मेराज अहमद ने कहा कि पहले हिंदी दिवस का आयोजन हिंदी सप्ताह के रूप में किया जाता था, लेकिन इस वर्ष विश्वविद्यालय के सहयोग से इसे हिंदी पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने हिंदी को अपनी आत्मा की भाषा बताया।
कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में एएमयू के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर मुजीबुल्लाह जुबेरी मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह में जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी में हिंदी भाषा एवं साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन की छात्रा हाना नोहारा ने हिंदी के प्रति अपने लगाव और हिंदी सीखने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जापान में भी हिंदी के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ रही है और ओसाका यूनिवर्सिटी में हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत से हजारों किलोमीटर दूर जापान में हिंदी दिवस का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि हिंदी की पहुंच और प्रभाव वैश्विक स्तर पर मौजूद है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक एवं हिंदी विभाग के प्रोफेसर शंभूनाथ तिवारी ने कहा कि जिस तरह सभी भाषाएं सम्मान के योग्य हैं, उसी तरह अपनी भाषा विशेष रूप से सम्माननीय होती है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी पखवाड़े के माध्यम से अपनी मातृभाषा को याद किया जा रहा है। उन्होंने हिंदी को आज वैश्विक भाषा का दर्जा प्राप्त होने की बात कही और हिंदी दिवस को राष्ट्रीय पर्व बताया।
विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी एवं हिंदी पखवाड़े के संयोजक असदुल्लाह खान ने हिंदी पखवाड़े के कार्यक्रमों की जानकारी दी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की ओर से भेजा गया हिंदी दिवस संदेश पढ़कर सुनाया। अंत में हिंदी विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद आशिक अली ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, बुद्धिजीवी, कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत गुलदस्ता और शॉल भेंट कर किया गया।




