सहारनपुर मस्जिद प्रकरण में AMUTA ने उठाए सवाल
स्वतंत्र न्यायिक जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

अलीगढ़, 7 सितंबर 2026 | मोहम्मद कामरान
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति की 7 सितंबर 2026 को हुई आपात बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया।
AMUTA के अध्यक्ष प्रोफेसर तुफैल अहमद, मानद सचिव डॉ. अशरफ मतीन और संयुक्त सचिव डॉ. जमील अहमद ने कहा कि ऐतिहासिक मस्जिद का ध्वस्तीकरण प्रशासनिक मनमानी, संवैधानिक संवेदनहीनता और बहुसंख्यकवादी रवैये को दर्शाता है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार मस्जिद उस जमीन पर स्थित थी, जिसे मुस्लिम समुदाय की ओर से दान किए जाने की बात सामने आई है और वहां मस्जिद एक सदी से अधिक समय से मौजूद थी। इसके बावजूद स्थानीय अदालत की प्रक्रिया के बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
AMUTA ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए उचित अवसर नहीं दिया गया और हाईकोर्ट का रुख करने सहित अन्य कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने का भी पूरा मौका नहीं मिला। प्रस्ताव में तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई कार्रवाई को उचित कानूनी प्रक्रिया और कानून के शासन के विपरीत बताया गया है।
एसोसिएशन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता और अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। AMUTA ने कहा कि बुलडोजर को शासन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता और प्रशासनिक शक्ति के जरिए नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
AMUTA ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने तथा कार्रवाई को मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने संवैधानिक संस्थाओं, न्यायपालिका और नागरिक समाज से अपील की कि भारत में धार्मिक बहुसंख्यकवाद या प्रशासनिक शक्ति के बजाय कानून का शासन सर्वोच्च बना रहे।


