नमो स्ट्डीज – माता सुंदरी कॉलेज सेमिनार में ‘टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता से इनोवेशन करने वाले बनने तक: विकसित भारत 2047 के निर्माण में ज़ेन जी की भूमिका’ पर चर्चा

'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने के लिए शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत संबंध, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप पर जोर दिया : आदित्य बिड़ला ग्रुप के डॉ. विनोद

 

अगर देश को ‘विकसित भारत 2047’ का अपना विजन साकार करना है, तो भारत की ज़ेन जी को टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता बने रहने से आगे बढ़कर इनोवेटर, एंटरप्रेन्योर, कुशल पेशेवर और रोजगार पैदा करने वाले के रूप में उभरना होगा। यह बात मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर विमेन के सहयोग से सेंटर फॉर नमो स्टडीज द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि और शिवसेना- एनडीए गठबंधन के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने कही।

“विकसित भारत 2047 के औद्योगीकरण में ज़ेन जी कैसे योगदान दे सकती है” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार में उद्योगपति, शिक्षाविद, पेशेवर, फैकल्टी सदस्य और छात्र शामिल हुए। इसमें देश की औद्योगिक, तकनीकी और आर्थिक नींव को मजबूत करने में युवा भारतीयों की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।

मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक वर्मा ने शिक्षा और उद्योग के बीच के अंतर को पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और अन्य उभरती हुई टेक्नोलॉजी का तेजी से विकास कार्यस्थलों को बदल रहा है और लगातार सीखते रहने, री-स्किलिंग (नई स्किल सीखना) और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता को जरूरी बना रहा है।

मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक वर्मा ने इंटर्नशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर, एप्लाइड रिसर्च, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स और एंटरप्रेन्योरशिप पहलों पर अधिक जोर देने का आह्वान किया ताकि छात्र क्लासरूम की सीख को असल दुनिया की चुनौतियों से जोड़ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगीकरण का दायरा केवल बड़ी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें पारंपरिक उद्योगों, स्थानीय उद्यमों और उभरते व्यवसायों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जहां ज़ेन जी प्रोडक्टिविटी और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल टूल्स और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकती है।

आदित्य बिड़ला ग्रुप के ग्रुप कॉर्पोरेट अफेयर्स प्रेसिडेंट, डॉ. विनोद के. वर्मा ने कहा कि तकनीकी जानकारी के साथ-साथ बातचीत की क्षमता, क्रिएटिविटी, एनालिटिकल सोच, टीमवर्क और हालात के अनुसार ढलने की क्षमता भी ज़रूरी है।

दयारानी वेलनेस की मेंटर और फाउंडर और रिलायंस की पूर्व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रीति श्रीवास्तव ने अनुशासन, लीडरशिप, लगन और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ज़ोर दिया। वहीं, फ़िरोज़ बख्त अहमद पूर्व चांसलर, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी ने भारतीय कंपनियों के लिए ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिशन, क्वालिटी और इनोवेशन के महत्व पर बात की।

सेंटर फॉर नमो स्टडीज  के चेयरमैन प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि भारत की डेमोग्राफिक बढ़त (युवा आबादी का फ़ायदा) तभी विकास की एक मज़बूत ताकत बन सकती है, जब युवाओं को सही स्किल, मौके और संस्थागत मदद मिले। उन्होंने ज़ेन जी से कहा कि वे खुद को सिर्फ़ फ़ायदा उठाने वाला न समझें, बल्कि ‘विकसित भारत’ की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप, रिसर्च, इनोवेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी को ऐसे मुख्य क्षेत्रों के तौर पर बताया जिनमें युवा योगदान दे सकते हैं।

इस सेमिनार का संचालन प्रो. दिव्या तंवर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत माता सुंदरी कॉलेज फॉर विमेन की प्रिंसिपल प्रो. हरप्रीत कौर के स्वागत भाषण से हुई, जबकि सेंटर फॉर नमो स्टडीज की तुषिता भंडारी ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के औद्योगिक बदलाव के लिए सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टमेंट ही काफ़ी नहीं होंगे। एक स्किल्ड, अनुशासित, इनोवेटिव और एंटरप्रेन्योर सोच वाली ‘जेन ज़ेड’ पीढ़ी, 2047 तक भारत को ज़्यादा प्रोडक्टिव, टेक्नोलॉजी के मामले में एडवांस्ड और ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव इकॉनमी बनाने की यात्रा में सबसे मज़बूत ताकतों में से एक बन सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button