मौलाना आजाद लाइब्रेरी में शोध और अकादमिक प्रकाशन कौशल को बढ़ावा देने के लिए सायफ्लो पर प्रशिक्षण आयोजित

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी ने आईग्रुप इंडिया के सहयोग से पुस्तकालय के सांस्कृतिक सभागार में ‘शोध प्रकाशन और संदर्भ प्रबंधन के लिए सायफ्लो का उपयोग’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य शोध क्षमताओं को मजबूत करना और अकादमिक लेखन में डिजिटल साधनों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को सायफ्लो डिजिटल मंच से परिचित कराया गया। यह मंच अकादमिक लेखन, संदर्भ प्रबंधन और शोध आलेखों की तैयारी में सहायक है। प्रशिक्षण में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शिक्षक, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल थे।

प्रतिस्पर्धा के बढ़ते अकादमिक माहौल में शोधकर्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध करने के साथ-साथ संदर्भों की शुद्धता, संबंधित शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन और शोध आलेखों को प्रभावी ढंग से तैयार करना भी आवश्यक है। सायफ्लो जैसे डिजिटल मंच उद्धरणों और संदर्भों के प्रबंधन, संदर्भ सूची तैयार करने तथा शोध पत्रिकाओं की आवश्यकताओं के अनुसार आलेखों का प्रारूप निर्धारित करने में मदद करते हैं।

मौलाना आजाद लाइब्रेरी की कार्यवाहक पुस्तकालयाध्यक्ष और कार्यशाला की संयोजक प्रो. निशात फातिमा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि एस. मुस्तफा के. क्यू. जैदी तथा विशेषज्ञ वक्ताओं डॉ. तारिक अशरफ और आर. सुनील कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि एस. मुस्तफा के. क्यू. जैदी ने अकादमिक क्षेत्र में आधुनिक शोध साधनों को अपनाने के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने शोध कार्य को सुगम बनाने और अकादमिक प्रकाशन की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अकादमिक पुस्तकालय अब शोध सहायता और डिजिटल शिक्षा के सक्रिय केंद्रों के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रो. निशात फातिमा ने अपने संबोधन में कहा कि शोधकर्ताओं के लिए शोध की गुणवत्ता के साथ संदर्भों की शुद्धता, शोध पत्रिकाओं के दिशा-निर्देशों का पालन और शोध आलेखों की व्यवस्थित तैयारी भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि सायफ्लो जैसे डिजिटल मंच इन प्रक्रियाओं को सरल और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

डॉ. तारिक अशरफ ने प्रतिभागियों को सायफ्लो की प्रमुख विशेषताओं और अकादमिक लेखन में इसके उपयोग से परिचित कराया। आर. सुनील कुमार ने मंच का चरणबद्ध व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इसमें स्वचालित रूप से संदर्भ सूची तैयार करना, शोध पत्रिकाओं के निर्धारित प्रारूप में आलेख तैयार करना, सामूहिक रूप से लेखन करना और शोध प्रकाशन प्रक्रिया को सरल बनाने वाली अन्य सुविधाएं शामिल थीं।

व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को संदर्भों के प्रबंधन और शोध आलेख तैयार करने में डिजिटल साधनों के उपयोग की जानकारी मिली। यह पहल विशेष रूप से नए शोधकर्ताओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी रही।

कार्यक्रम का समन्वय उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. हबीबुर रहमान खान ने किया, जबकि सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. जाफर इकबाल सह-समन्वयक रहे। सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ ने कार्यक्रम का संचालन किया और डॉ. शमामा फिरदौस ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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