अलीगढ़ में किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास पर कार्यशाला आयोजित

डॉ. फिरदौस जहाँ ने तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और काउंसलिंग के महत्व पर दिया जोर

अलीगढ़, 28 अक्टूबर 2026 (मोहम्मद कामरान)। इमैनुएल हॉस्पिटल एसोसिएशन के यूपी अर्बन प्रोजेक्ट, अलीगढ़ की ओर से आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित समुदायों की किशोरियों के लिए “स्ट्रॉन्गर विदिन: रेजिलिएंस, सेल्फ-बिलीफ एंड द पावर ऑफ काउंसलिंग” विषय पर एक इंटरैक्टिव कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य किशोरियों में आत्मविश्वास बढ़ाना, मानसिक एवं भावनात्मक मजबूती विकसित करना, तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाना तथा जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यशाला का संचालन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीईआईसी–सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. फिरदौस जहाँ ने किया। उन्होंने दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से किशोरियों को मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।

कार्यशाला के दौरान कई गतिविधियों के माध्यम से महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया। गेंद उछालने की गतिविधि के जरिए मानसिक दृढ़ता और कठिनाइयों के बाद दोबारा आगे बढ़ने की क्षमता का महत्व बताया गया। वहीं, कागज को मसलने की गतिविधि के माध्यम से समझाया गया कि कटु शब्दों, आलोचना और अपमानजनक व्यवहार का व्यक्ति की भावनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बातचीत में संवेदनशीलता बरतना और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है।

टूटे हुए मिट्टी के बर्तन से संबंधित गतिविधि के माध्यम से भावनात्मक पीड़ा, सहानुभूति और आपसी सहयोग के महत्व पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसे अनुभव हो सकते हैं, जिनकी पीड़ा बाहर से दिखाई नहीं देती। ऐसे में दूसरों के प्रति संवेदनशीलता, धैर्य और सहयोग का व्यवहार अपनाना आवश्यक है।

सर्कल गतिविधि के माध्यम से किशोरियों को उन परिस्थितियों के बीच अंतर समझाया गया, जिन्हें वे नियंत्रित नहीं कर सकतीं और उन पहलुओं की पहचान कराई गई, जिनमें वे अपनी सोच, व्यवहार, निर्णय और प्रयासों के जरिए सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। इस दौरान छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

डॉ. फिरदौस जहाँ ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और काउंसलिंग भी प्रदान की। उन्होंने तनाव प्रबंधन, भावनाओं को समझने, नकारात्मक सोच से निपटने, सकारात्मक आत्मविश्वास विकसित करने तथा अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति उसकी योग्यता, सम्मान या भविष्य की संभावनाओं का निर्धारण नहीं करती। मानसिक रूप से मजबूत होने का अर्थ हर समस्या को अकेले सहन करना नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी विश्वसनीय व्यक्ति या विशेषज्ञ से सहायता लेना भी साहस और समझदारी का प्रतीक है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. फिरदौस जहाँ की इंटर्न टीम की सदस्य सुश्री सिमना और दो अन्य इंटर्न ने एक प्रभावशाली रोल-प्ले प्रस्तुत किया। इसमें नकारात्मक आत्म-चिंतन, पढ़ाई से जुड़ी कठिनाइयों, भावनात्मक तनाव और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने जैसी परिस्थितियों को दर्शाया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को सहानुभूतिपूर्ण संवाद, सकारात्मक सोच, समस्या समाधान और दूसरों को सहयोग देने के व्यावहारिक तरीकों को समझने का अवसर मिला।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किशोरियों को अपनी क्षमताओं पहचानने, आत्मसम्मान विकसित करने, कठिन परिस्थितियों में उम्मीद बनाए रखने और अपने भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यशाला का संदेश था कि परिस्थितियां किसी व्यक्ति की पहचान तय नहीं करतीं। हर लड़की की आवाज महत्वपूर्ण है, उसके सपने मायने रखते हैं और मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस और आत्मबल की निशानी है।

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