एएमयू के इंदिरा गांधी हॉल की छात्राओं का सब्र जवाब दे गया, समस्याओं को लेकर पहुंचीं वीसी लॉज

अलीगढ़, 28 अगस्त (मोहम्मद कामरान)।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर विरोध का सिलसिला एक बार फिर सामने आया है। शुक्रवार को इंदिरा गांधी हॉल में रह रही छात्राएं अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर वीसी लॉज पहुंच गईं। छात्राओं ने हॉल से पैदल मार्च किया और वीसी लॉज के मुख्य गेट पर पोस्टर चस्पा कर अपनी नाराजगी जाहिर की।

बताया गया कि छात्राओं की नाराजगी की प्रमुख वजहों में हॉस्टल में साफ-सफाई की समस्या, आवारा कुत्तों और बंदरों की मौजूदगी, भवन की जर्जर हालत तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन समस्याओं को लेकर छात्राओं में पिछले कुछ समय से नाराजगी बढ़ती जा रही थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी बात सीधे विश्वविद्यालय की शीर्ष प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंचाने का फैसला किया।

छात्राओं का कहना था कि हॉल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए वे पहले भी संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रख चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें वीसी लॉज तक पहुंचना पड़ा।

छात्राओं के वीसी लॉज पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें समझा-बुझाकर वापस हॉल भेजा। इसके बाद प्रॉक्टर समेत अन्य अधिकारी इंदिरा गांधी हॉल पहुंचे और छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।

इंदिरा गांधी हॉल की प्रोवोस्ट प्रोफेसर बदर जहां ने बताया कि छात्राओं की कुछ समस्याएं थीं, जिन्हें लेकर वे एकत्र हुई थीं। प्रशासन के अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाया है। उन्होंने बताया कि कुछ मामले फंड से जुड़े हैं, जबकि हॉल में सफाई के लिए स्वीपरों की कमी का मुद्दा भी सामने आया है।

प्रोफेसर बदर जहां के अनुसार हॉल में जरूरी कार्यों के लिए टेंडर उठाए जा चुके हैं और जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्य पूरा होने के बाद छात्राओं को इन समस्याओं से राहत मिलेगी।

शिकायत के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

एएमयू में पिछले कुछ समय से छात्र अपनी समस्याओं को लेकर लगातार मुखर होते दिखाई दे रहे हैं। कभी हॉस्टल से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं तो कभी अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर छात्र विरोध का रास्ता अपनाते हैं। इंदिरा गांधी हॉल की छात्राओं का वीसी लॉज पहुंचना भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है।

सवाल यह है कि यदि हॉस्टल स्तर पर ही छात्रों की बुनियादी समस्याओं का समय रहते समाधान हो जाए, तो क्या उन्हें अपनी शिकायतें लेकर विश्वविद्यालय की शीर्ष प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंचने की जरूरत पड़ेगी? अब देखना होगा कि टेंडर के बाद काम कब शुरू होता है और छात्राओं को इन समस्याओं से वास्तविक राहत कब मिलती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button