एएमयू छात्राओं से कथित धक्का-मुक्की का मामला पहुंचा राष्ट्रपति भवन, एएमयू प्रॉक्टर के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग

अलीगढ़, 14 सितंबर। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्राओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और अनुचित शारीरिक संपर्क को लेकर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. नावेद खान के खिलाफ राष्ट्रपति को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
अधिवक्ता इब्राहीम खान की ओर से 14 सितंबर को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं से जुड़ी एक घटना सामने आई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना से संबंधित उपलब्ध वीडियो/दृश्य सामग्री में प्रॉक्टर प्रो. नावेद खान द्वारा छात्राओं के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार और धक्का-मुक्की किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायत में मामले को गंभीर बताते हुए कहा गया है कि प्रॉक्टर विश्वविद्यालय में अनुशासन और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे में छात्राओं के साथ कथित व्यवहार की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने राष्ट्रपति से संबंधित सक्षम प्राधिकारी को मामले का तत्काल संज्ञान लेकर स्वतंत्र जांच के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
शिकायत में घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण साक्ष्य के प्रभावित होने की संभावना न रहे। साथ ही संबंधित छात्राओं के बयान महिला अधिकारी या महिला फैकल्टी की मौजूदगी में दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।
इसके अलावा शिकायत करने वाली छात्राओं को किसी भी प्रकार के दबाव, प्रतिशोध या उत्पीड़न से सुरक्षा देने तथा जांच निष्पक्ष रूप से पूरी करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के संबंध में उचित अंतरिम व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।
आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विश्वविद्यालय के नियमों और लागू कानून के अनुसार संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित एवं कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालय में छात्राओं से जुड़े मामलों में महिला फैकल्टी या महिला अधिकारियों की पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा से जुड़े मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।
शिकायत की प्रतियां केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को भी भेजी गई हैं। शिकायतकर्ता ने राष्ट्रपति से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित सक्षम प्राधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध किया है।



