एएमयू में जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर अनुमति पर विवाद, छात्रों के कार्यक्रम में बनी रही असमंजस की स्थिति
अलीगढ़, 26 अगस्त (मोहम्मद कामरान)।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बुधवार को मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (MSO) के तत्वावधान में छात्रों की ओर से जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में छात्रों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। जुलूस एएमयू के डक प्वाइंट से शुरू होकर बाब-ए-सैयद होते हुए स्टैच्यू हॉल पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। इस दौरान छात्रों ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की सीरत, शिक्षाओं और उनके संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
हालांकि, जुलूस को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति का मुद्दा भी दिनभर चर्चा में रहा। छात्रों के अनुसार, MSO को जुलूस के आयोजन के लिए एएमयू प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं मिल सकी थी, जिसके चलते कुछ समय तक विश्वविद्यालय परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर की ओर से कहा गया कि जब तक जुलूस के संबंध में लिखित आवेदन प्राप्त नहीं होता, तब तक अनुमति दिया जाना संभव नहीं है। वहीं छात्रों का कहना था कि यह जुलूस वर्षों से आयोजित होता आ रहा है और पूर्व में इसके लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी।
अनुमति के मुद्दे को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच काफी देर तक बातचीत और असमंजस की स्थिति बनी रही। इसके बाद छात्रों ने जुलूस निकाला और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम को संपन्न किया।
एक छात्र ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि अलीगढ़ की एक शैक्षिक संस्था के कुछ लोग अब इस जुलूस के आयोजन से सहमत नहीं हैं। छात्र ने बताया कि पहले जब उक्त लोग जुलूस में शामिल होते थे, तब आयोजन सुचारू रूप से होता था, लेकिन अब वही लोग इसके आयोजन में बाधा पैदा कर रहे हैं। हालांकि।
जुलूस में शामिल छात्रों ने कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी उनके लिए धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर है। इसका उद्देश्य पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद की सीरत, उनके आदर्शों, शिक्षाओं और इंसानियत के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है। छात्रों ने कहा कि वे इस अवसर के माध्यम से समाज में भाईचारे, सद्भाव, शांति और नैतिक मूल्यों का संदेश पहुंचाना चाहते हैं।
जुलूस में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी रही। छात्रों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा उनके संदेश को समाज तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। अनुमति को लेकर पैदा हुए विवाद और असमंजस के बावजूद जुलूस निर्धारित मार्ग से होते हुए शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।




