एएमयू के इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन, प्रो. इरफान हबीब ने विश्वविद्यालय की विरासत और विभाजन के बाद उसके संरक्षण पर डाला प्रकाश

प्रख्यात इतिहासकार एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस प्रोफेसर इरफान हबीब ने आज सर सैयद अकादमी में आयोजित समारोह में प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा केन्द्र के निदेशक डॉ. शमीम अख्तर द्वारा लिखित पुस्तक ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयः ए हिस्ट्री’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नइमा खातून, सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान तथा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कुलपति ने लेखक को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई दी।
अपने संबोधन में प्रोफेसर इरफान हबीब ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेखकिया। उन्होंने विशेष रूप से विभाजन के समय विश्वविद्यालय के संरक्षण और उसके अस्तित्व को बनाए रखने में भारत सरकार की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास पर पहले भी अनेक पुस्तकें लिखी गई हैं, लेकिन यह पुस्तक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विश्वविद्यालय की सामाजिक भूमिका के साथ-साथ उसके प्रशासन और संचालन का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने राष्ट्र निर्माण और देश के विकास में अमूल्य योगदान दिया है।
प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि यह पुस्तक केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का इतिहास नहीं, बल्कि अलीगढ़ नगर और विश्वविद्यालय के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना और विकास के लिए अनेक लोगों ने त्याग और बलिदान दिया, जिनमें सर सैयद अहमद खान का योगदान सर्वोपरिहै। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ आंदोलन ने आधुनिक शिक्षा के प्रसार की मजबूत नींव रखी और अनेक क्षेत्रों में नई पहल की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का वीमेन्स कॉलेज वर्ष 1938 में स्थापित हुआ था, जो दिल्ली के कई प्रतिष्ठित कालिज से पहले अस्तित्व में आ चुका था। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ आंदोलन के अनेक महत्वपूर्ण योगदान आज भी व्यापक रूप से सामने नहीं आ सके हैं और डॉ. शमीम अख्तर की यह पुस्तक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
विशिष्ट अतिथि एवं सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि अलीगढ़ आंदोलन ने देश के बौद्धिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान के नेतृत्व में इस आंदोलन ने प्रगतिशील सोच को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि इतिहास भविष्य का मार्गदर्शन करता है और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का इतिहास संकलित कर डॉ. शमीम अख्तर ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य किया है। उन्होंने प्रोफेसर इरफान हबीब द्वारा पुस्तक का लोकार्पण किए जाने को एक शुभ अवसर बताया।
इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व समन्वयक प्रोफेसर सैयद अली नदीम रेजावी ने पुस्तक में उठाए गए विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को एक संवैधानिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्था के रूप में विशिष्ट ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य के संस्करणों में कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया जा सकता है।
सर सैयद अकादमी के निदेशक प्रोफेसर शाफे किदवई ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयः ए हिस्ट्री’ विश्वविद्यालय के प्रशासन और संचालन की दृष्टि से किया गया एक महत्वपूर्ण अध्ययन है।
कार्यक्रम में उपनिदेशक डॉ. मोहम्मद शाहिद ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि डॉ. हुसैन हैदर ने कार्यक्रम का संचालन किया।



