एएमयू के शोधकर्ताओं को टिकाऊ कंक्रीट प्रौद्योगिकी पर दूसरा भारतीय पेटेंट प्राप्त

अलीगढ़, 7 जुलाईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं को टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट के विकास से संबंधित एक अभिनव सीमेंटयुक्त संरचना (सीमेंटिशियस कंपोजिशन) विकसित करने पर दूसरा भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है।
‘ए सीमेंटिशियस कंपोजिशन एंड ए प्रोसेस फॉर द प्रिपरेशन देयरऑफ’ शीर्षक वाले इस आविष्कार को भारत सरकार ने 6 जुलाई, 2026 को पेटेंट संख्या 594399 प्रदान किया है। यह शोध डॉ. सैयद मोहम्मद इब्राहीम, डॉ. साद शमीम अंसारी तथा प्रो. सैयद दानिश हसन द्वारा विकसित किया गया है। यह पेटेंट अगले 20 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
इस पेटेंट तकनीक में पारंपरिक कंक्रीट में छिद्रयुक्त फ्लाई ऐश सेनोस्फीयर्स तथा विशेष रूप से वितरित नैनो-सिलिका प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे उच्च प्रदर्शन वाला एवं पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री तैयार होती है। इस तकनीक से कंक्रीट की दरार-प्रतिरोधक क्षमता, भार वहन क्षमता, फ्लेक्सुरल एवं तन्य शक्ति, आयामी स्थिरता तथा उच्च तापमान सहने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। साथ ही औद्योगिक उप-उत्पादों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी) की खपत भी कम होती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक टिकाऊ, हल्के एवं अग्निरोधी कंक्रीट के निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रस्तुत करती है। इससे हरित निर्माण (ग्रीन कंस्ट्रक्शन) को बढ़ावा मिलेगा तथा कम कार्बन उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।


