नेत्रदान से दूसरों की जिंदगी में लौट रही रोशनी
एएमयू आई बैंक को 30 नेत्रदान, 20 से अधिक कॉर्निया प्रत्यारोपण में मिली मदद

अलीगढ़, 7 सितंबर 2026 | मोहम्मद कामरान
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में नेत्रदान पखवाड़े के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉर्निया संबंधी अंधता की रोकथाम और जरूरतमंद लोगों की दृष्टि बहाल करने में योगदान देने वाले नेत्रदाताओं के परिजनों, स्वयंसेवी संगठनों और अन्य सहयोगियों को सम्मानित किया गया।
पंद्रह दिवसीय अभियान के दौरान एएमयू आई बैंक को 30 नेत्रदान प्राप्त हुए, जिनसे 20 से अधिक कॉर्निया प्रत्यारोपण में मदद मिली। नेत्रदाताओं के परिजनों को अपने प्रियजनों की आंखें दान करने के निस्वार्थ निर्णय और दूसरों के जीवन में रोशनी लौटाने में सहयोग के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कुछ परिजनों ने अपने अनुभव भी साझा किए और नेत्रदान को महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर अदीब आलम खान ने देश में कॉर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत और दान किए गए कॉर्निया की उपलब्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग एक लाख कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जबकि दान किए गए कॉर्निया की उपलब्धता और उनके प्रभावी उपयोग की दर अभी भी राष्ट्रीय जरूरत की तुलना में कम है।
आई बैंक के प्रभारी डॉ. जिया सिद्दीकी ने नेत्रदाताओं की समय पर पहचान, आंखों को प्राप्त करने, सुरक्षित रखने, जांच और दान किए गए ऊतकों के प्रभावी इस्तेमाल की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
असिस्टेंट आई बैंक प्रभारी डॉ. मोहम्मद साकिब ने बताया कि 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में लगभग 8.2 प्रतिशत, जबकि 0 से 49 वर्ष की आयु के लोगों में 37.5 प्रतिशत दृष्टिहीनता का कारण कॉर्निया का धुंधलापन है।
कार्यक्रम में ‘देह दान संस्था’ के सदस्यों और डॉ. एसके गौड़ को नेत्रदान तथा आई बैंक की गतिविधियों में उनके योगदान के लिए स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
समारोह में प्रोफेसर ए.के. अमिताभा, प्रोफेसर अब्दुल वारिस, प्रोफेसर हिना कौसर, डॉ. शरद कुमार, डॉ. जहरा अंसारी और श्री रजत सक्सेना सहित अन्य शिक्षक, चिकित्सक और सहयोगी मौजूद रहे। अंत में डॉ. जिया सिद्दीकी ने सभी अतिथियों, नेत्रदाताओं के परिजनों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।



