आईआईटी दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में एएमयू ने शोधगंगा में उद्धरण ट्रैकिंग की रूपरेखा प्रस्तुत की

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मौलाना आजाद पुस्तकालय के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली में आयोजित इलेक्ट्रॉनिक शोधप्रबंधों और शोध-प्रबंधों पर 29वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (ईटीडी 2026) में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। संगोष्ठी में पुस्तकालयाध्यक्षों, शोधार्थियों, शैक्षणिक विशेषज्ञों और डिजिटल प्रकाशन से जुड़े पेशेवरों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में इलेक्ट्रॉनिक शोधप्रबंधों की बदलती भूमिका पर चर्चा की।
एएमयू के प्रतिनिधिमंडल में पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रो. निशात फातिमा, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. आसिफ फरीद सिद्दीकी और डॉ. हबीबुर रहमान खान तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष सैयद शाज हुसैन शामिल थे। उनकी भागीदारी ने डिजिटल पुस्तकालयों, इलेक्ट्रॉनिक शोधप्रबंध संग्रहों, शैक्षणिक संवाद और शोध की दृश्यता से जुड़े नए विकास में विश्वविद्यालय की सक्रिय भागीदारी को रेखांकित किया।
एएमयू भारत के इलेक्ट्रॉनिक शोधप्रबंधों के राष्ट्रीय संग्रह ‘शोधगंगा’ में प्रमुख योगदान देने वाले विश्वविद्यालयों में शामिल है। इस संग्रह का संचालन इन्फ्लिबनेट केंद्र करता है। विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों के शोध कार्यों को शैक्षणिक समुदाय के लिए खुले तौर पर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संगोष्ठी का प्रमुख आकर्षण सैयद शाज हुसैन और प्रो. निशात फातिमा द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र “ईटीडी बियॉन्ड स्टोरेजः इंटीग्रेटिंग साइटेशन ट्रैकिंग इन शोधगंगा” रहा। शोधपत्र में शोधगंगा को शोधप्रबंधों के संरक्षण और प्रसार तक सीमित न रखते हुए उसमें उद्धरणों की पहचान करने, लेखकों को उचित श्रेय देने और शोध कार्यों के शैक्षणिक प्रभाव को अधिक स्पष्ट रूप से सामने लाने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
प्रो. निशात फातिमा ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा में डेटासाइट के माध्यम से स्थायी पहचान प्रणाली, ऑर्किड के जरिए शोधकर्ताओं की पहचान, ग्रोबिड की सहायता से संदर्भों का स्वचालित निष्कर्षण और खुले शैक्षणिक संसाधनों के माध्यम से उद्धरणों की खोज को शामिल किया गया है।
शोधपत्र की नवीन अवधारणा और शोध कार्यों की दृश्यता तथा प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों की विशेषज्ञों और डिजिटल प्रकाशन क्षेत्र के पेशेवरों ने सराहना की। इस विषय को सेज इंडिया के लिंक्डइन पृष्ठ पर भी स्थान मिला, जिससे शैक्षणिक संवाद के बदलते परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को पहचान मिली।
ईटीडी 2026 में एएमयू के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी से विश्वविद्यालय में शोध संग्रहों के विकास, शोध के प्रभाव के आकलन और भारतीय शोधार्थियों के शोध कार्यों की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने की दिशा में आगे काम होने की उम्मीद है।



