अलीगढ़ में मुस्लिम युवकों पर हमला: जमीअत उलेमा के प्रतिनिधिमंडल ने घायलों से की मुलाकात, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

अलीगढ़, 2 मई -मोहम्मद कामरान
अलीगढ़ थाना दिल्ली गेट क्षेत्र के खैर रोड इलाके में गत रात मुस्लिम नौजवानों पर हुए हमले के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आज जमीअत उलेमा जिला अलीगढ़ का एक प्रतिनिधिमंडल घायल युवकों आज़म और वजाहत के घर पहुंचा और उनका हालचाल जाना। परिजनों के अनुसार दोनों युवक फिलहाल घर पर ही उपचाराधीन हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, आज़म और वजाहत अपनी दुकान के बाहर खड़े थे, तभी आरोपी मनीष अपने साथियों के साथ वहां मौजूद था। आरोप है कि वजाहत को देखकर उसने आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोपी ने मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आए आज़म को भी हमलावरों ने निशाना बनाया। इस हमले में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में मुख्य आरोपी मनीष समेत पांच नामजद और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
जमीअत उलेमा के प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष सैयद कारी अब्दुल्ला, महासचिव मौलाना अब्दुलमताली, कारी अब्दुल मजीद चौधरी और मौलाना यूसुफ नदवी शामिल रहे। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और घटना पर गहरी चिंता जताई।
जिला अध्यक्ष सैयद कारी अब्दुल्ला ने कहा कि “इस तरह की घटनाएं समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं। यदि आरोपियों के खिलाफ जल्द और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो कानून का डर खत्म हो जाएगा और असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होंगे।”
जमीअत उलेमा उत्तर प्रदेश के सचिव कारी अब्दुल मजीद चौधरी ने कहा कि “ऐसे मामलों को हल्के में लेना बड़ी गलती होगी। समय रहते कार्रवाई न होने पर इससे नफरत और अशांति बढ़ेगी, जबकि सख्त कानूनी कदम से समाज में शांति और भाईचारा मजबूत होगा।”
महासचिव मौलाना अब्दुलमताली ने भी कहा कि “ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा हैं। निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई ही न्याय और शांति सुनिश्चित कर सकती है।”
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर निष्पक्ष जांच के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।



