एएमयू के प्रो. एम. रिजवान खान का शेक्सपीयर पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य व्याख्यान

TNN समाचार ; अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. एम. रिजवान खान द्वारा “ऑल द इंटरनेट इज अ स्टेजः शेक्सपीयर एंड डिजिटल ह्यूमैनिटीज-एक्सप्लोरिंग द बार्ड इन द एल्गोरिदमिक एज” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत कियागया। इस संगोष्ठी का आयोजन करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर के स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग द्वारा ऑथर्स प्रेस, दिल्ली के सहयोग से तथा आईक्यूएसी/केसीसी के सहयोग से किया गया।
अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष एवं आयोजन सचिव डॉ. एस. एम. यहिया इब्राहिम ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मुख्य वक्ता, विशिष्ट अतिथियों और विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और शेक्सपीयर अध्ययन तथा डिजिटल तकनीकों के अंतर्संबंधों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. खान ने डिजिटल युग में साहित्यिक अध्ययन के बदलते स्वरूप का गहन और विचारोत्तेजक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एल्गोरिदमिक प्रणालियाँ, डिजिटल अभिलेखागार और कम्प्यूटेशनल उपकरण पढ़ने, लेखकीयता और व्याख्या की पारंपरिक अवधारणाओं को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं। जाक देरिदा, रोलां बार्थ और मिशेल फूको जैसे सिद्धांतकारों के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अभिलेखागार की अस्थिरता, पाठीयता में परिवर्तन और व्याख्यात्मक अधिकार के पुनर्स्थापन पर प्रकाश डाला।
अपने व्याख्यान में उन्होंने “शेक्सपीयर समस्या” पर भी विशेष चर्चा की, जिसमें बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण परियोजनाएँ एक ओर जहां साहित्य तक पहुँच का विस्तार करती हैं, वहीं दूसरी ओर स्थापित साहित्यिक धारणाओं को मजबूत करते हुए कम चर्चित रचनाओं और लेखकों को हाशिये पर भी धकेल सकती हैं। उन्होंने डिजिटल संरचनाओं के प्रति समालोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि समावेशिता और व्याख्यात्मक गहराई सुनिश्चित की जा सके।
प्रो. खान ने यह भी कहा कि वर्तमान डिजिटल परिवेश में शेक्सपीयर केवल एक ऐतिहासिक लेखक के रूप में नहीं, बल्कि पाठों, प्रस्तुतियों, डाटा सेट्स और कम्प्यूटेशनल प्रणालियों में सक्रिय एक गतिशील और बहुस्तरीय उपस्थिति के रूप में उभरते हैं।
यह तीन दिवसीय संगोष्ठी देश और विदेश के विद्वानों, शोधार्थियों और छात्रों को एक मंच पर लाकर डिजिटल ह्यूमैनिटीज और शेक्सपीयर अध्ययन से जुड़े विषयों पर सार्थक शैक्षणिक विमर्श को प्रोत्साहित करेगी।
मुख्य व्याख्यान सत्र के बाद विचारपूर्ण चर्चा भी हुई, जिसमें समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।



