एएमयू शिक्षकों का प्रदर्शन: जमीन पर नगर निगम की कार्रवाई का विरोध, सेंटेनरी गेट पर रोके जाने पर भी जताई नाराजगी
उपशीर्षक: राष्ट्रपति के नाम एडीएम सिटी को सौंपा ज्ञापन, राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने और 20 अगस्त की कार्रवाई की जांच की मांग

अलीगढ़, 24 अगस्त (मोहम्मद कामरान)।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की जमीन को लेकर सोमवार को एएमयू टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) समेत विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जमीन को लेकर नगर निगम की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे विश्वविद्यालय के हितों के विपरीत बताया। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति के नाम अपना ज्ञापन संबंधित अधिकारी को सौंपने के लिए उस जमीन तक जाना चाहते थे, लेकिन एएमयू प्रशासन और प्रॉक्टोरियल टीम ने उन्हें सेंटेनरी गेट पर रोक दिया और गेट बंद कर दिया। शिक्षकों ने उन्हें प्रदर्शन स्थल तक जाने से रोके जाने पर भी नाराजगी जताई। इस दौरान मौके पर नारेबाजी हुई और काफी देर तक स्थिति गरमाई रही।
प्रदर्शन में एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद, सचिव प्रो. अशरफ मतीन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विश्वविद्यालय से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका पहले से तय कार्यक्रम बेगम सुल्तान जहां हॉल के सामने स्थित संबंधित जमीन तक जाकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने का था। उन्होंने प्रॉक्टर से पहले ही अनुरोध किया था कि जिला प्रशासन को इसकी सूचना देकर किसी अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेजा जाए।

प्रो. तुफैल अहमद और प्रो. अशरफ मतीन ने कहा कि शिक्षक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, ऐसे में उन्हें विश्वविद्यालय के सेंटेनरी गेट पर रोकना और गेट बंद करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षक विश्वविद्यालय की जमीन के संरक्षण के लिए आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने निर्धारित स्थान तक जाने से रोका जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संबंधित जमीन पर विश्वविद्यालय का कब्जा 13 जून 1925 से चला आ रहा है और इस संबंध में विश्वविद्यालय के पास दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना था कि वे कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की जमीन के संरक्षण और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना भी जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की ओर से जमीन को लेकर की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे विश्वविद्यालय का शांतिपूर्ण माहौल प्रभावित हुआ है। शिक्षकों का कहना था कि वे सामान्य तौर पर कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन जमीन के मुद्दे को लेकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है।
प्रॉक्टर ने कहा- ज्ञापन के लिए अधिकारी को बुलाया गया
दूसरी ओर, एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. नावेद खान ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने टीचर्स एसोसिएशन से अनुरोध किया था कि वे अपना ज्ञापन विश्वविद्यालय परिसर में ही जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी को सौंप दें। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन से संपर्क किया गया है और अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए मौके पर पहुंचे। प्रॉक्टर ने प्रदर्शनकारियों से अपना विरोध विश्वविद्यालय परिसर में ही रखने की अपील की थी।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में उठाए कई मुद्दे
प्रदर्शनकारियों की ओर से एडीएम सिटी को राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि संबंधित जमीन पर विश्वविद्यालय का कब्जा 13 जून 1925 से है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 1992 के आसपास राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, जिसके कारण जमीन के म्यूटेशन में भी परिवर्तन हुआ। विश्वविद्यालय ने राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन किया था और मामला अभी विचाराधीन है।
ज्ञापन में 20 अगस्त 2026 को जमीन से संबंधित हुई कार्रवाई की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की गई। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान और किसी भी तरह की अनियमितता अथवा अधिकारों के दुरुपयोग की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई।
ज्ञापन में अलीगढ़ नगर निगम के नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा द्वारा संबंधित जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताए जाने का भी उल्लेख किया गया। साथ ही जमीन पर स्टेडियम, स्कूल और पुलिस स्टेशन सहित विभिन्न निर्माण योजनाओं की चर्चा का हवाला देते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की गई।
नगर निगम की कार्रवाई की जांच की मांग
शिक्षकों ने राष्ट्रपति से मांग की कि विश्वविद्यालय की जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को सही कराया जाए, 20 अगस्त की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अधिकारों का दुरुपयोग पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन द्वारा मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए एसडीएम को दिए गए निर्देश का स्वागत किया। अंततः एडीएम सिटी ने मौके पर पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्राप्त किया। ज्ञापन सौंपने के बाद शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की जमीन के संरक्षण और नगर निगम की कार्रवाई की जांच की मांग को दोहराया।



