एएमयू में भारत में मुसलमानों की शैक्षिक और आर्थिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू किया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एजुकेशनल एंड कल्चरल एडवांसमेंट ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडिया (सीईपीईसीएएमआई) द्वारा ‘भारत में मुसलमानों की शैक्षिक और आर्थिक स्थिति चुनौतियां, अवसर और नीतिगत सुझाव’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जे.एन. मेडिकल कॉलेज सभागार में शुरू हुआ। सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने शिक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया तथा समावेशी विकास के लिए शोध आधारित रणनीतियों और नीतिगत उपायों पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने की। हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के महानिदेशक और एएमयू के पूर्व छात्र मनोज यादव, आईपीएस, मुख्य अतिथि रहे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अर्थशास्त्री प्रोफेसर प्रो. अमिताभ कुंडू ने मुख्य व्याख्यान दिया, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के निदेशक एवं प्रोफेसर प्रो. के.एम. बहारुल इस्लाम विशिष्ट अतिथि रहे।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. नईमा खातून ने शैक्षिक और आर्थिक अवसरों के विस्तार के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने समावेशी और समान विकास को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां प्रतिभाओं को विकसित होने, सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देने और युवाओं को समाज तथा राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के अवसर मिलें।
मुख्य अतिथि मनोज यादव ने एएमयू में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए शिक्षा, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और समान अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उपयुक्त कौशल के माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में उनकी प्रभावी भागीदारी को मजबूत कर सकता है।
प्रो. अमिताभ कुंडू ने मुसलमानों की शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए विश्वसनीय आंकड़ों, लक्षित हस्तक्षेपों और उपयुक्त नीतिगत उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. के.एम. बहारुल इस्लाम ने शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण को महत्वपूर्ण बताते हुए अकादमिक निष्कर्षों और नीतिगत सुझावों को व्यावहारिक पहलों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर कुलपति और अन्य अतिथियों ने सीईपीईसीएएमआई की पत्रिका ‘नक्श-ए-फर्दा’ तथा सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया।
सीईपीईसीएएमआई के निदेशक प्रो. मोहम्मद मोहीबुल हक ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने शोध, संवाद और सार्थक अकादमिक सहभागिता के माध्यम से शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
सीईपीईसीएएमआई के सहायक निदेशक एवं सम्मेलन के सह-संयोजक डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने अपने शेरों के माध्यम से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भरते हुए उद्घाटन सत्र का संचालन किया।
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए और विस्तृत चर्चा हुई। विचार-विमर्श में समकालीन चुनौतियों, उभरते अवसरों तथा शिक्षा के विकास, आर्थिक सशक्तीकरण और समावेशी विकास को मजबूत करने के लिए नीतिगत रणनीतियों पर चर्चा की गई।
सम्मेलन शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के बीच अंतरविषयक संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है। चर्चाओं का उद्देश्य शैक्षिक और आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक एवं शोध आधारित सुझाव तैयार करना है।

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