एएमयू में 2500 बेड के हॉस्टल का प्रस्ताव, नरेन्द्र मोदी के नाम पर रखने की मांग

अलीगढ़, 11 सितंबर (मोहम्मद कामरान): अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कमी को लेकर उठ रही छात्रों की मांग अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। पहले छात्रों के लिए नए हॉस्टल बनाने की मांग सामने आई थी और अब इसी मुद्दे पर एएमयू के छात्र सोनपाल सिंह और मोहम्मद सलमान गौरी ने बहस आयोजित कराने की पहल की है। छात्रों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन देकर यूनियन हॉल में प्रस्तावित बहस की अनुमति मांगी है। बहस में एएमयू हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से 2500 बेड का हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी।
खास बात यह है कि जिस जमीन पर हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, वही जमीन इन दिनों एएमयू और अलीगढ़ नगर निगम के बीच विवाद का केंद्र बनी हुई है। नगर निगम की ओर से जमीन पर दावा किए जाने के बाद मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है, जहां एएमयू और नगर निगम दोनों अपने-अपने दावे और पक्ष रख रहे हैं।
इसी विवादित जमीन को लेकर छात्र सोनपाल सिंह और मोहम्मद सलमान गौरी का कहना है कि यदि न्यायालय के फैसले के बाद यह जमीन एएमयू को मिलती है तो इसी स्थान पर छात्रों के लिए नरेन्द्र मोदी के नाम से 2500 बेड का हॉस्टल बनाया जाना चाहिए।
दोनों छात्रों ने इस प्रस्ताव के संबंध में अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम से भी पहल करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि 2500 बेड के हॉस्टल के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाकर इसके लिए योजना तैयार कराई जाए। छात्रों का कहना है कि एएमयू में हॉस्टल की भारी कमी है और बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निजी पीजी और अन्य स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में छात्रों की आवास और सुरक्षा संबंधी समस्या को दूर करने के लिए नए हॉस्टल का निर्माण जरूरी है।
इस पूरे मामले के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि विवादित जमीन पर हॉस्टल निर्माण का प्रस्ताव किस दिशा में आगे बढ़ता है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रस्ताव पर विचार करता है तो जमीन के स्वामित्व और न्यायालय में लंबित मामले को लेकर कई कानूनी सवाल उठ सकते हैं। वहीं, यदि प्रशासन इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखता है तो हॉस्टल की कमी और छात्रों के लिए नई आवासीय सुविधाओं की जरूरत को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
सोनपाल सिंह और मोहम्मद सलमान गौरी की ओर से बहस के माध्यम से इस मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने की कोशिश को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके जरिए एएमयू में हॉस्टल की कमी के साथ-साथ हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन से जुड़े विवाद पर छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच खुली चर्चा का अवसर मिल सकता है।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि एएमयू प्रशासन यूनियन हॉल में बहस आयोजित कराने की अनुमति के आवेदन पर क्या निर्णय लेता है और दूसरी ओर हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन से संबंधित लंबित मामले में एसडीएम न्यायालय का फैसला क्या रुख अपनाता है। फिलहाल 2500 बेड के प्रस्तावित हॉस्टल और उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से रखने के प्रस्ताव ने एएमयू में हॉस्टल की कमी के साथ जमीन विवाद को भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



