32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में जयपुरिया स्कूल बना युवा वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स का मंच
195 विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए विज्ञान आधारित प्रोजेक्ट, पांच प्रोजेक्ट अगले चरण के लिए चयनित

अलीगढ़, 4 नवंबर 2026 (मोहम्मद कामरान)। आगरा रोड स्थित सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया गया। इसमें शहर के विभिन्न विद्यालयों से आए 195 छात्र-छात्राओं ने अपने वैज्ञानिक मॉडल, शोध आधारित प्रोजेक्ट और नवाचार से जुड़े विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और विज्ञान एवं तकनीक के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना रहा।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय और सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएसआईआर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं प्रोफेसरों ने निर्णायक मंडल के रूप में विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया। जूरी पैनल में सेवानिवृत्त प्रोफेसर ए.के.एस. चौहान, प्रो. विनीत गुप्ता, प्रो. संगीत कुमार, प्रो. इकराम (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग), प्रो. रियाज (जूलॉजी विभाग), प्रो. अनवर शहजाद (बॉटनी विभाग), डॉ. नीलम शर्मा और डॉ. आफरीना रिजवी शामिल रहीं। निर्णायकों ने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट की वैज्ञानिक उपयोगिता, मौलिकता और व्यावहारिक संभावनाओं का बारीकी से आकलन किया।

जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. पूरन सिंह ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने कई संभावनाओं से भरे विचार प्रस्तुत किए हैं। उचित मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर ये विचार भविष्य में उपयोगी नवाचारों का रूप ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ब्लॉक स्तर पर चयनित विद्यार्थियों के जनपद स्तरीय आयोजन में 195 छात्र-छात्राओं ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। निर्णायक मंडल के मूल्यांकन के बाद पांच प्रोजेक्ट अगले चरण के लिए चयनित किए जाएंगे, जबकि पांच अन्य प्रोजेक्ट रनर-अप के रूप में रखे जाएंगे।
जिला विज्ञान क्लब के जिला समन्वयक राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम “Science and Innovation for Sustainability” यानी सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार है। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध की भावना और समाज की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।

स्कूल के चेयरमैन इंजीनियर सुमित सर्राफ ने कहा कि अलीगढ़ की पहचान केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। यहां से तकनीक और उद्यमिता के क्षेत्र में भी प्रतिभाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल का प्रयास विद्यार्थियों को वैज्ञानिक, इनोवेटर और सफल उद्यमी बनने के लिए बेहतर अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।

स्कूल की डायरेक्टर आकांक्षा सर्राफ ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेलकूद और परफॉर्मिंग आर्ट्स को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्कूल मेंटर नितिन पचौरी ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और तकनीक आधारित पढ़ाई की जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल ऐप पर कक्षाओं की लाइव रिकॉर्डिंग, स्टडी पीडीएफ और विषयवार टेस्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को STEM लैब में प्रयोग और प्रैक्टिकल के माध्यम से अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।

स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी उपाध्याय ने डीआईओएस कार्यालय की टीम, जूरी सदस्यों, अतिथियों और प्रतिभागी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के कौशल विकास के उद्देश्य से 22 नवंबर को एक विशेष कैंप भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें शहर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा प्रदर्शित करने और भविष्य के नवाचारों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।



