सड़कों की गुणवत्ता में लापरवाही पर नगर आयुक्त सख्त, भुगतान के बाद भी हर तीन माह में होगी जांच
15 दिन की देरी पर 5 प्रतिशत और एक माह की देरी पर 10 प्रतिशत जुर्माना, लापरवाह ठेकेदारों को किया जाएगा ब्लैकलिस्ट

अलीगढ़, 4 नवंबर 2026 (मोहम्मद कामरान) शहर में विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को नगर निगम सेवा भवन सभागार में करीब चार घंटे चली निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने पिछले एक वर्ष में बनी सड़कों, नालों और अन्य निर्माण कार्यों का पूरा ब्यौरा मुख्य अभियंता से तलब किया।
नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि पिछले एक वर्ष में पूर्ण हुए सभी निर्माण कार्यों का प्रत्येक तीन माह में स्थलीय भौतिक सत्यापन कराया जाए। यह जांच उन कार्यों की भी होगी जिनका भुगतान ठेकेदारों को किया जा चुका है। निर्माण में गुणवत्ता की कमी, सड़क टूटने या निर्धारित मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम द्वारा बनवाई जाने वाली सड़कों की पांच वर्ष की मेंटेनेंस अवधि में रखरखाव और गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। इस अवधि में सड़क क्षतिग्रस्त होने या गुणवत्ता में कमी मिलने पर ठेकेदार को अपने खर्च पर मरम्मत करानी होगी।
बैठक में उन ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई का निर्णय लिया गया, जिन्होंने टेंडर और अनुबंध मिलने के बावजूद निर्धारित समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं किए। ऐसे ठेकेदारों को 15 दिन की देरी पर पहला नोटिस और 5 प्रतिशत जुर्माना, जबकि एक माह की देरी पर दूसरा नोटिस और 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी काम शुरू नहीं करने पर अनुबंध निरस्त करने और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग के सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं को दीपावली के बाद अपने-अपने क्षेत्रों में प्रतिदिन फील्ड विजिट कर निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों में विकास कार्यों को पूरी तत्परता से पूरा कराया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि अब निर्माण कार्यों की निगरानी केवल उनके पूरा होने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भुगतान के बाद भी नियमित जांच होगी। पांच वर्ष की रखरखाव अवधि में सड़क खराब होने या गुणवत्ता में कमी मिलने पर संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



