एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में महिला रेज़िडेंट डॉक्टर से मारपीट, हड़ताल
स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित; सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एक महिला रेज़िडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल करदी है, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। इस घटना ने न सिर्फ डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मरीजों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के अध्यक्ष डॉ. समी अहमद खान ने बताया कि यह घटना इमरजेंसी अल्ट्रासाउंड ड्यूटी के दौरान हुई, जब डॉ. मरियम एक मरीज को देख रही थीं। उसी दौरान एक महिला मरीज अपने अल्ट्रासाउंड को तुरंत कराने की मांग कर रही थीं, जबकि पहले से कई इमरजेंसी केस लंबित थे। डॉक्टर द्वारा थोड़ी देर इंतजार करने को कहने पर विवाद बढ़ गया और मरीज के परिजन ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया। मना करने पर स्थिति और बिगड़ गई और आरोप है कि डॉक्टर के साथ हाथापाई करते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिए गए।
डॉ. खान के अनुसार, मौके पर मौजूद वरिष्ठ डॉक्टरों ने किसी तरह स्थिति को संभाला, लेकिन इसके बावजूद आरोपी महिला ने दोबारा डॉक्टर पर हमला किया।
उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जब एक महिला डॉक्टर के पर हमला हुआ है, तो हम अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाने को मजबूर हैं। जब तक हमारी मुख्य मांग—सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने—पूरी नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी।”
वहीं, RDA के उपाध्यक्ष डॉ. अख्तर अली ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक डॉक्टर का मामला नहीं, बल्कि पूरे मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा, “रेज़िडेंट डॉक्टर दिन-रात तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं। अगर उनकी ही सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।”
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में कार्यरत रेज़िडेंट्स को आए दिन मरीजों और उनके परिजनों से अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह घटना उनके लिए आखिरी हद साबित हुई है, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
हालांकि, इस हड़ताल का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। इलाज के लिए दूर-दराज़ से आए कई मरीज बिना उपचार के ही वापस लौटने को मजबूर हैं।
मरीजों के परिजनों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “हम सुबह से इंतजार कर रहे थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से हमें बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है।”
वहीं, एक अन्य परिजन ने कहा, “डॉक्टरों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन मरीजों की परेशानी भी कम नहीं है। प्रशासन को जल्द समाधान निकालना चाहिए।”
गौरतलब है कि इस घटना के बाद डॉक्टरों में भारी आक्रोश है और वे लगातार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन और डॉक्टरों के बीच वार्ता की उम्मीद जताई जा रही है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही उनकी मांगें पूरी होंगी, हड़ताल समाप्त कर दी जाएगी।




