एएमयू में उर्दू साहित्य और पर्यावरण चेतना पर संगोष्ठी आयोजित

अलीगढ़, मोहम्मद कामरान : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग द्वारा “उर्दू साहित्य और पर्यावरण अध्ययन” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्य, प्रकृति और समकालीन पर्यावरणीय चिंताओं के परस्पर संबंधों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमरुल हुदा फरीदी ने कहा कि यद्यपि पर्यावरण अध्ययन एक आधुनिक शैक्षणिक विषय है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं लंबे समय से उर्दू साहित्य का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू के शास्त्रीय और आधुनिक साहित्यकारों ने मानव और प्रकृति के संबंधों को विभिन्न और सार्थक रूपों में प्रस्तुत किया है।
मुख्य अतिथि प्रो. नदीम अहमद (जामिया मिल्लिया इस्लामिया) ने औद्योगीकरण से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा करते हुए पारिस्थितिक असंतुलन को दूर करने के लिए वृक्षारोपण और जन-जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं प्रो. मोहम्मद अली जौहर ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और उसके प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली, प्रो. सरवर साजिद, डॉ. मोइद रशीदी और डॉ. उमर रजा ने पर्यावरण अध्ययन और उर्दू साहित्य में प्रकृति के चित्रण के बीच अंतर पर विचार व्यक्त किए तथा कविता और गद्य से उदाहरण प्रस्तुत किए। डॉ. मोइदुर रहमान ने प्रमुख पर्यावरणीय सिद्धांतों और आलोचनात्मक दृष्टिकोणों पर चर्चा करते हुए साहित्यिक अध्ययन में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
संगोष्ठी में विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने पर्यावरण जागरूकता के बढ़ते महत्व तथा उसके उर्दू साहित्यिक परंपराओं में प्रतिबिंब पर सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए।



