अलीगढ़ साहित्य कला महोत्सव की पहल साहित्य, विचारों, संस्कृति और समावेशिता का उत्सव मनाने को है : प्रो जसीम मोहम्मद

'अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल' तीन दिवसीय महोत्सव दिसंबर 2026 को अलीगढ़ में आयोजित होगा

टीएनएन समाचार : अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल (अलीगढ़ साहित्य कला महोत्सव) एक नई साहित्यिक और सांस्कृतिक पहल है, जिसका उद्देश्य लेखन, रचनात्मकता और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पटल बनाना है। यह तीन दिवसीय महोत्सव दिसंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर अलीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।
अलीगढ़ अपनी गहरी शिक्षा, विद्वता और बौद्धिक आंदोलनों की परंपरा के लिए जाना जाता है। यह शहर कई पीढ़ियों के विद्वानों, लेखकों, सुधारकों और विचारकों का घर रहा है, जिन्होंने विचारों को आकार दिया और सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित किया। इसी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए, अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल एक ऐसी आधुनिक जगह बनाना चाहता है जहाँ साहित्य, संस्कृति, कला और अलग-अलग तरह की आवाज़ें एक साथ आ सकें।
अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल की औपचारिक घोषणा नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में की गई। इस मौके पर असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी; सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के चेयरमैन प्रो. जसीम मोहम्मद; पटना हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी; स्वामी देवेंद्र ब्रह्मचारी; गृह मंत्रालय की राजभाषा समिति की सदस्य माया कुलश्रेष्ठ; जावेद रहमानी, दौलत राम और प्रो. दिव्या तंवर के साथ-साथ कई जाने-माने विद्वान, शिक्षाविद और सांस्कृतिक हस्तियां मौजूद थीं।
इस फेस्टिवल में भारत की कुछ प्रमुख साहित्यिक और रचनात्मक हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें फिल्म निदेशक महेश भट्ट, सांसद कंगना रनौत, मशहूर शायर वसीम बरेलवी, जाने-माने कवि और आलोचक अशोक वाजपेई, मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के साथ-साथ किरण बेदी, पद्म श्री आनंद कुमार, बनारस लिटरेचर फेस्टिवल की डॉ. अपर्णा सिंह, पत्रकार अनिल माहेश्वरी, प्रो. रहमान मुसव्विर और अन्य प्रतिष्ठित लेखक, कवि, कलाकार, शिक्षाविद और सांस्कृतिक विचारक शामिल हैं।
इस पहल का स्वागत करते हुए असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य, लेखन और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 
अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल के प्रबंध न्यासी प्रोफ़ेसर जसीम मोहम्मद ने फेस्टिवल के विज़न के बारे में बात करते हुए कहा कि अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल को विचारों, कहानियों और इंसानी रिश्तों के जश्न के तौर पर देखा गया है।
जसीम मोहम्मद कहा कि, “अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल क्रिएटिविटी, ज्ञान और इंसानी जज़्बे का जश्न है। साहित्य में संस्कृतियों और सीमाओं से परे लोगों को एक साथ लाने और हमें अलग-अलग नज़रिए को समझने में मदद करने की ताकत है।”

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