एएमयू में डॉ. शहना अली के पहले उपन्यास ‘द व्हाइट कोट्स वेट’ का विमोचन

अलीगढ़, 22 अक्टूबर (मोहम्मद कामरान)। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शहना अली के पहले उपन्यास ‘द व्हाइट कोट्स वेट’ का विमोचन एएमयू स्टाफ क्लब में आयोजित समारोह में किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने उपन्यास के केंद्रीय विषय, डॉक्टरों के सामने आने वाली भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों तथा इसकी साहित्यिक विशेषताओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए फारसी की प्रमुख विद्वान प्रोफेसर आजरमीदख्त सफवी ने उपन्यास में भावनाओं के वास्तविक चित्रण और साहित्यिक सौंदर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास उन लोगों की अनकही कमजोरियों और आंतरिक जीवन को सामने लाता है, जो दूसरों को स्वस्थ करने के लिए खुद को समर्पित कर देते हैं। इसमें पेशेवर जीवन की वास्तविकताओं और गहरी मानवीय भावनाओं का प्रभावशाली चित्रण किया गया है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर ए.आर. किदवई ने डॉ. अली की संवेदनशीलता और सहानुभूति की भावना की सराहना करते हुए कहा कि उपन्यास के विषय चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें व्यापक मानवीय सरोकार दिखाई देते हैं। उन्होंने उपन्यास की भाषा की काव्यात्मक विशेषताओं और मानवीय व पारिवारिक मूल्यों से उसके जुड़ाव को भी रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि एवं सर सैयद अकादमी के निदेशक प्रोफेसर शाफे किदवई ने उपन्यास की साहित्यिक खूबियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसमें चिकित्सा पेशे से जुड़ी भावनात्मक वास्तविकताओं को रचनात्मक और कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने शैक्षणिक जगत में रचनात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति को महत्वपूर्ण बताया।
दूसरे विशिष्ट अतिथि और चिकित्सा संकाय के डीन प्रोफेसर मोहम्मद खालिद ने चिकित्सा पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियों और भावनात्मक दबाव पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों के जीवन में धैर्य, दृढ़ता और सहानुभूति का विशेष महत्व है।
उपन्यास में डॉक्टर सना की कहानी प्रस्तुत की गई है, जो एक गंभीर दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित हो जाती है। कहानी में उसके इनकार से स्वीकार्यता तक के सफर, डॉक्टरों के स्वयं मरीज बनने पर सामने आने वाली कमजोरियों, पेशेवर जीवन की चुनौतियों और परिवार के सहयोग व संवेदनशीलता के महत्व को उजागर किया गया है।
कार्यक्रम में लेखिका के पिता और प्रसिद्ध कथाकार प्रोफेसर गजनफर अली, अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर आसिम सिद्दीकी और प्रोफेसर समी रफीक, उर्दू कथाकार एवं आलोचक प्रोफेसर तारिक छतारी, राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मुहिबुल हक, चिकित्सा विभाग की डॉ. लुबना जफर और डॉ. आमना ने भी विचार व्यक्त किए। लेखिका की बेटी इंशा ने उपन्यास लिखने के दौरान अपनी मां की लगन और मेहनत के बारे में बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारिक अकील ने किया। अंत में डॉ. शहना अली ने आभार व्यक्त करते हुए अपने परिवार, सहयोगियों और शुभचिंतकों के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने पुस्तक को पाठकों तक पहुंचाने के लिए नामक पब्लिकेशंस का भी धन्यवाद किया।



