रूयत-ए-हिलाल कमेटी का ऐलान: ज़िलक़ादा का चांद नजर आया, कल पहली ज़िलक़ादा होगी

अलीगढ़, 18 अप्रैल (मोहम्मद कामरान):
अलीगढ़ की शाही जामा मस्जिद अलीगढ़ में रूयत-ए-हिलाल कमेटी की एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें ज़िलक़ादा का चांद नजर आने की तस्दीक के बाद ऐलान किया गया कि कल पहली ज़िलक़ादा होगी।
बैठक की सदारत मौलाना महमूद उल हसन कासमी ने की, जबकि अन्य प्रमुख सदस्यों में मुफ़्ती मोहम्मद राशिद, डॉ. उबैद इक़बाल आसिम, मौलाना अब्दुल मजीब कासमी, हाजी मोहम्मद सूफ़ियान, मोहम्मद मुस्लिम बारी, इफ्तिखार आलम, मुकर्रम अली सिद्दीकी, हाजी अब्दुल मलिक, कारी मोहम्मद अशरफ, मक़सूद अहमद, रिज़वान अहमद और मोहम्मद अहमद शिवन मौजूद रहे।
इस मौके पर मौलाना महमूद उल हसन कासमी ने चांद देखने की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस्लामी महीनों का निर्धारण चांद की रूयत पर आधारित है, जो न सिर्फ एक दीनि फर्ज़ है बल्कि उम्मत-ए-मुस्लिमाह की एकता का जरिया भी है। उन्होंने कहा कि चांद देखने का एहतिमाम सुन्नत-ए-नबवी ﷺ का हिस्सा है और इसे जिंदा रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि हर इस्लामी महीने की 29 तारीख को अपने-अपने इलाकों में चांद देखने का खास एहतिमाम करें और अगर कहीं चांद नजर आए तो फौरन स्थानीय रूयत-ए-हिलाल कमेटी को सूचना दें, ताकि सही और समय पर ऐलान किया जा सके।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि चांद की रूयत के मामले में आपसी सहयोग और जिम्मेदारी का परिचय दें, ताकि दीनि उसूलों के मुताबिक इस्लामी महीनों का सही निर्धारण हो सके। अंत में मौलाना की दुआ के साथ बैठक का समापन हुआ।



