‘हर घर तिरंगा’ व्याख्यान में कर्नल आकाश पाटिल, डॉ. दिनेश दुबे और डॉ. मो. शम्स इकबाल हुए शामिल : नमो अध्ययन केन्द्र
'हर घर तिरंगा' अभियान का मकसद Gen-Z को ज़िम्मेदार नागरिकता से जोड़ना है; नमो अध्ययन केन्द्र के व्याख्यान

टीएनएन समाचार, 18 अगस्त 2026: सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के तत्वाधान में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से “हर घर तिरंगा” पर एक व्याख्यान नई दिल्ली में आयोजित की। इसका मकसद ‘जेनरेशन Z’ (आज की युवा पीढ़ी) को एकता, नागरिक ज़िम्मेदारी, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक जीवन में रचनात्मक भागीदारी जैसे मूल्यों से जोड़ना था।
मुख्यवक्ता डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने कहा कि समाज को आकार देने में युवाओं की अहम भूमिका है और उन्हें अपनी स्किल्स और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी से करना चाहिए।
कर्नल पाटिल ने युवाओं से बताया कि, “युवा सिर्फ़ देश का भविष्य ही नहीं हैं; वे देश के वर्तमान को आकार देने में भी अहम भागीदार हैं। ज़िम्मेदारी तब शुरू होती है जब हम यह समझते हैं कि हमारे व्यक्तिगत कामों का समाज पर असर पड़ता है।”
‘द इमर्जिंग वर्ल्ड’ दैनिक समाचार पत्र के संपादक डॉ. दिनेश दुबे ने डिजिटल सूचना के माहौल में युवाओं की ज़िम्मेदारी पर प्रकाश डाला। डॉ. दुबे ने कहा, “डिजिटल युग में, हर व्यक्ति एक संभावित पब्लिशर बन गया है। इस मौके के साथ ही जानकारी को शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि करने की ज़िम्मेदारी भी आती है।”
शिक्षा मंत्रालय के ‘नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ़ उर्दू लैंग्वेज’ के निदेशक डॉ. मो. शम्स इकबाल ने ज़िम्मेदार नागरिक बनाने में शिक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया।
डॉक्टर इकबाल ने कहा, “शिक्षा सिर्फ़ रोज़गार ही नहीं देती; यह समझ, आत्मविश्वास और ज़िम्मेदारी की भावना भी विकसित करती है। एक शिक्षित युवा पीढ़ी ही प्रगतिशील समाज की सबसे मज़बूत नींव बन सकती है।” उन्होंने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
अपने शुरुआती संबोधन में, सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के सभापति प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान केवल सरकार द्वारा चलाई गई योजना ही नहीं है यह हर स्वयंसेवक और संगठनों की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने युवा नागरिकों को एकता, सेवा और ज़िम्मेदारी जैसे व्यापक मूल्यों से जोड़ने का मौका दे सकता है।
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा, “राष्ट्रीय ध्वज सिर्फ़ दिखाने और फोटो खिंचवाने की चीज़ नहीं है; यह हमारे साझा मूल्यों, एकता और सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसका संदेश तब सार्थक होता है जब हम उन मूल्यों को अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाते हैं।” उन्होंने देश के विकास में योगदान देने की ‘जेन-ज़ी’ की क्षमता पर भी ज़ोर दिया। प्रो जसीम मोहम्मद ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्र दिवस के लालकिला से ऐतिहासिक भाषण दिये जाने की प्रशंसा किया।
इस व्याख्यान को संचालन जर्नलिज्म टुडे ग्रुप के समूह संपादक जावेद रहमानी ने किया, जिन्होंने युवाओं में आलोचनात्मक सोच और ज़िम्मेदार डिजिटल भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया। धन्यावाद ज्ञापन जामिया मिल्लिया इस्लामिया की शोधार्थी तुषिता भंडारी ने दिया।



