एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की हुंकार, पूर्व सचिव हुज़ैफ़ा आमिर रशादी यासिर के समर्थन में पहुंचे
13 दिन की भूख हड़ताल पर यासिर, एएमयू छात्रसंघ चुनाव को लेकर हुज़ैफ़ा आमिर रशादी ने प्रशासन को घेरा

अलीगढ़, 03 अक्टूबर (मोहम्मद कामरान)।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शनिवार को 13वें दिन भी जारी रहा। लगातार 13 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता यासिर फहद से मिलने एएमयू छात्रसंघ के पूर्व सचिव हुज़ैफ़ा आमिर रशादी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने यासिर की तबीयत की जानकारी ली और छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।
धरना स्थल पर छात्रों को संबोधित करते हुए हुज़ैफ़ा आमिर रशादी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ कथित तौर पर ज्यादती की जा रही है। बाब-ए-सैयद पर पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ कथित बदसलूकी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एएमयू की अपनी ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक परंपरा रही है और उसे कायम रखना जरूरी है।
उन्होंने एएमयू के प्रॉक्टर के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए उनके व्यवहार की तुलना जनरल डायर से की। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि एक ज्ञानेश कुमार दिल्ली में काम कर रहे हैं, जबकि उनके अनुसार एएमयू में भी एक “ज्ञानेश कुमार” हैं, जो विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कुलपति प्रो. नईमा खातून से प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज पर ध्यान देने की अपील की।
छात्रसंघ चुनाव को लेकर हुज़ैफ़ा आमिर रशादी ने कहा कि छात्रसंघ छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक संघर्ष का मंच है। उनके अनुसार, वर्षों से चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों की सामूहिक आवाज कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि उनके छात्रसंघ के बाद से दोबारा चुनाव नहीं हुए हैं।
उन्होंने पिछले वर्ष हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव कराने की बात कही गई थी और चुनाव के विकल्प भी तय किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद चुनाव नहीं कराए गए।
यासिर फहद की 13 दिन से जारी भूख हड़ताल पर चिंता जताते हुए हुज़ैफ़ा आमिर रशादी ने कहा कि अगर लगातार भूख हड़ताल के कारण यासिर की तबीयत बिगड़ती है या उन्हें कोई नुकसान होता है तो इसकी जवाबदेही विश्वविद्यालय प्रशासन को तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि अब मामला केवल छात्रसंघ चुनाव का नहीं, बल्कि एक छात्र की सेहत का भी है।
एएमयू की जमीन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय की जमीन नगर निगम की है तो वीसी लॉज को भी नगर निगम की संपत्ति मान लेना चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर कार्यालय को थाना बनाने की बात भी व्यंग्यात्मक अंदाज में कही।
कुलपति पर सरकार के दबाव से जुड़े सवाल पर हुज़ैफ़ा आमिर रशादी ने कहा कि कुलपति खुद बता सकती हैं कि वह कहां से निर्देशित हो रही हैं और उन्हें कौन आदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार को कानून के अनुसार काम करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव हो सकते हैं तो एएमयू में चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए चुनाव कराने का स्पष्ट रोडमैप जारी करने की मांग की।



