किन्नर समुदाय की आवाज़ को नई पहचान देती है डॉ. बेबी नीलम की पुस्तक

 


अलीगढ़, 17 जुलाई (मोहम्मद कामरान)।

अलीगढ़ किन्नर समुदाय के अधिकारों, सामाजिक पहचान और समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखकर लिखी गई सहायक प्रोफेसर डॉ. बेबी नीलम की शोधपरक पुस्तक “ऑक्यूपाइंग द ग्रे: द बैटल फॉर नॉन-बाइनरी स्पेस” का भव्य लोकार्पण समारोह दोधपुर स्थित सीतारा पैलेस में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारत पब्लिकेशन हाउस, दिल्ली–अलीगढ़ के तत्वावधान में हुआ।

समारोह की मुख्य अतिथि श्री 1008 महामंडलेश्वर आरती नंद गिरी (सनातनी किन्नर अखाड़ा, प्रयागराज) ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके कमजोर और उपेक्षित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता से होती है। उन्होंने कहा कि किन्नर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक जिम्मेदारी है तथा जागरूकता ही इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

कार्यक्रम में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के प्रो. नौशाद अली, यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद यूनुस खान तथा अल-बरकात संस्थान की शिक्षा संकाय की प्राचार्य डॉ. रुबीना ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कृति किन्नर समुदाय के जीवन, संघर्ष, सामाजिक स्वीकार्यता, शिक्षा और अधिकारों पर गंभीर एवं तथ्यपरक अध्ययन प्रस्तुत करती है। उन्होंने इसे सामाजिक विमर्श को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण शोधग्रंथ बताया।

वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल शोध कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों को चुनौती देते हुए समावेशी सोच को मजबूत करने का प्रयास करती है। पुस्तक में किन्नर समुदाय के अनुभवों और चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाया गया है, जो नीति निर्माताओं, शोधार्थियों और समाज के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन ओमकार शर्मा ने किया। भारत पब्लिकेशन हाउस, दिल्ली–अलीगढ़ के निदेशक मोहम्मद रफ़ीक़ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान सामाजिक सरोकारों और शिक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर गुणवत्तापूर्ण साहित्य एवं शोध कार्यों के प्रकाशन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा।

समारोह में नूरैन, राशिद अली सहित शिक्षा, साहित्य, शोध एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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