गंभीर रूप से जले मरीज भी अब जी सकते हैं सामान्य जीवन : डॉ. शाहीन नूरीयज़दान

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), अलीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम में बर्न (जलने) के आधुनिक उपचार और बच्चों की यूरोलॉजी में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने चिकित्सकों को नवीनतम जानकारी दी।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शाहीन नूरीयज़दान ने कहा कि गंभीर रूप से जलने वाले मरीजों के इलाज का उद्देश्य अब केवल उनकी जान बचाना नहीं, बल्कि उन्हें फिर से सामान्य जीवन जीने योग्य बनाना भी है। उन्होंने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल्स में ऐसे कई मरीजों का सफल उपचार किया जा रहा है, जिनका शरीर 60 से 80 प्रतिशत तक जल चुका होता है। समय पर क्रिटिकल केयर, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और प्रभावी पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के माध्यम से ऐसे मरीजों को सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से जलना आज भी चिकित्सा जगत की सबसे चुनौतीपूर्ण आपात स्थितियों में से एक है। ऐसे मरीजों का तत्काल उपचार शुरू करना बेहद आवश्यक होता है, जिसके लिए इमरजेंसी विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर चिकित्सक, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन तथा रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञों की समन्वित टीम मिलकर कार्य करती है।
कार्यक्रम में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ सलाहकार, पीडियाट्रिक यूरोलॉजी एवं पीडियाट्रिक सर्जरी डॉ. सुजीत चौधरी ने बच्चों की यूरोलॉजी में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से जटिल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और कम चीर-फाड़ के साथ संभव हो रही है। इससे बच्चों को कम दर्द होता है, छोटे निशान पड़ते हैं, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और वे तेजी से स्वस्थ हो जाते हैं।
सीएमई के दौरान विशेषज्ञों ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों और नई चिकित्सा खोजों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार हो रही तकनीकी प्रगति से जटिल बीमारियों के उपचार के परिणाम पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर हो रहे हैं।



