प्रो. सिराजुद्दीन अजमली ने संभाली उर्दू विभाग की जिम्मेदारी, एडवांस स्टडी सेंटर की बहाली प्राथमिकता

अलीगढ़, 10 अगस्त (मोहम्मद कामरान)। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के नवनियुक्त चेयरमैन प्रोफेसर सैयद सिराजुद्दीन अजमली ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने विभाग के एडवांस स्टडी सेंटर को दोबारा शुरू कराने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा कि इसकी बहाली के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती प्रोफेसर कमरुल हुदा फरीदी से चेयरमैन का कार्यभार ग्रहण किया।

प्रो. सिराजुद्दीन अजमली ने कहा कि यूजीसी की ओर से एएमयू के उर्दू विभाग को एडवांस स्टडी सेंटर का दर्जा मिलना उर्दू भाषा और साहित्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन बाद में यह केंद्र बंद हो गया। उन्होंने कहा कि इसे दोबारा शुरू कराना आसान नहीं है, लेकिन संबंधित स्तर पर प्रयास और संवाद के जरिए इस दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एएमयू का उर्दू विभाग लंबे समय से शैक्षिक, शोध और साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेमिनार, संगोष्ठी और अन्य अकादमिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। नई पीढ़ी को उर्दू के साहित्यिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ना भी विभाग की प्राथमिकताओं में रहेगा।

प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली उर्दू के जाने-माने शिक्षक, शोधकर्ता, आलोचक और कवि हैं। उनका जन्म सिकंदरपुर, बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और बौद्धिक विकास साहित्यिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। उनके नाना शाह सैयद अहमद अजमली सज्जादानशीन थे। सैयद अकमल अजमली, मौलाना सैयद अफजल अजमली और प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि एवं अनुवादक अजमल अजमली ने भी उनकी साहित्यिक और बौद्धिक परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद में प्राप्त करने के बाद उन्होंने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीए किया। 1989 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए की डिग्री हासिल की और इसी वर्ष जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी उत्तीर्ण की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर कमर रायस की देखरेख में एमफिल और पीएचडी का शोध कार्य पूरा किया।

अपने शिक्षण जीवन के दौरान वह ऑल इंडिया रेडियो, दिल्ली की उर्दू सेवा से भी जुड़े रहे। वर्ष 1997 में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में लेक्चरर के रूप में कार्यभार संभाला और बाद में प्रोफेसर बने।

प्रो. अजमली की पहचान शास्त्रीय उर्दू और फारसी साहित्य के गंभीर अध्येता के रूप में भी है। उर्दू शायरी की परंपरा, शास्त्रीय एवं आधुनिक गजल तथा साहित्यिक इतिहास उनके प्रमुख अध्ययन क्षेत्रों में शामिल हैं। उन्हें तारीखगोई की कला में भी विशेष रुचि रही है।

उनकी प्रमुख शोध एवं आलोचनात्मक पुस्तकों में ‘तरक्की पसंद तहरीक और उर्दू गजल’ शामिल है, जो 1996 में प्रकाशित हुई। उनके अनेक शोध और आलोचनात्मक लेख देश-विदेश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में व्याख्यान भी दिए हैं।

उर्दू विभाग की चेयरमैनशिप संभालने के बाद प्रो. अजमली के सामने विभाग की शैक्षिक एवं शोध गतिविधियों को विस्तार देने, साहित्यिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और एडवांस स्टडी सेंटर की बहाली जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। उनके व्यापक शिक्षण अनुभव और साहित्यिक जुड़ाव से विभाग की अकादमिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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