राजनीति में धर्म का सहारा लेने के बजाय सरकारें जवाबदेही निभाएं: मौलाना कल्बे रुशैद
अलीगढ़, 10 अगस्त (मोहम्मद कामरान)। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे रुशैद सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में उत्तर प्रदेश की राजनीति, कृष्ण जन्मभूमि को लेकर कारसेवा, अलीगढ़ का नाम बदलने की चर्चा और लाउडस्पीकर विवाद समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी।
कृष्ण जन्मभूमि के लिए कारसेवा की चर्चा पर उन्होंने कहा कि जब राजनीति अपने प्रदर्शन और काम के आधार पर बेहतर स्थिति में नहीं होती तो कई बार धर्म का सहारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति करने के बजाय सरकारों को अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए। जनता को रोजगार, विकास और अन्य बुनियादी मुद्दों पर सरकारों से सवाल करने चाहिए।
अलीगढ़ के नाम पर बोले- फैसला शहर के लोगों की भावनाओं से हो
अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ किए जाने की चर्चा पर मौलाना कल्बे रुशैद ने कहा कि अलीगढ़ केवल एक शहर का नाम नहीं, बल्कि देश की एक महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि इस शहर ने अलग-अलग धर्म और वर्ग के लोगों को शिक्षा, ज्ञान और तरक्की का रास्ता दिखाया है। शहर वहां रहने वाले लोगों का होता है, इसलिए उसके नाम को लेकर अंतिम निर्णय भी लोगों की भावनाओं और पसंद को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नाम बदलने से किसी शहर की दूरी कम नहीं होती और न ही किलोमीटर घटते हैं। सरकारों को नाम बदलने की राजनीति के बजाय विकास, रोजगार और जनसुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
लाउडस्पीकर पर नियम सभी के लिए समान हों
बंगाल में लाउडस्पीकर की आवाज कम किए जाने और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के सवाल पर मौलाना ने कहा कि यदि कहीं लाउडस्पीकर का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के खिलाफ रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में किया जा रहा है और इससे मरीजों, बच्चों या आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है तो जनहित में प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति, संगठन या समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। लाउडस्पीकर धार्मिक आवश्यकता नहीं बल्कि एक सुविधा है और इसके इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद खड़ा करने के बजाय लोगों को लाउडस्पीकर के उचित और जिम्मेदार इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को राजनीतिक नजरिए से देखने की जरूरत
तीन देशों के कथित समझौते और मक्का की सुरक्षा से जुड़े सवाल पर मौलाना कल्बे रुशैद ने कहा कि ऐसे मामलों को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समाज और देश के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। राजनीति में धर्म का इस्तेमाल करने के बजाय जनहित, विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।




