गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व
32वें महान कीर्तन दरबार में रागी जत्थों ने गुरुवाणी से संगत को किया निहाल, अरदास के बाद अटूट लंगर बरता गया

अलीगढ़, 4 नवंबर 2026 (मोहम्मद कामरान)
केंद्रीय गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बैकुंठ नगर में सिखों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 32वें महान कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्थानों से आए रागी जत्थों ने गुरुवाणी और कीर्तन के माध्यम से संगत को निहाल किया।
कार्यक्रम में भाई सहेंद्र सिंह हजूरी रागी जत्था, भाई गुरमुख सिंह (उत्तर प्रदेश सिख मिशन, हापुड़) तथा भाई अमनदीप सिंह (माता कौला जी, श्री अमृतसर साहिब, पंजाब) ने गुरु रामदास जी के जीवन, शिक्षाओं और समाज को दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बताया कि श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश 24 सितंबर 1534 को लाहौर की चूना मंडी में हुआ था। उनके पिता का नाम हरदास जी और माता का नाम दया कौर जी था। बचपन में माता-पिता का निधन होने के बाद उनका पालन-पोषण नानी ने किया। उन्होंने बचपन में छोले बेचकर जीवनयापन किया। बाद में उनका विवाह गुरु अमरदास जी की सुपुत्री बीबी भानी जी से हुआ। गुरु रामदास जी ने अमृतसर नगर की स्थापना और स्वर्ण मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वर्ण मंदिर के चारों द्वार सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए खुले हैं। यहां 24 घंटे गुरु का लंगर चलता है, जिसमें बिना किसी भेदभाव के सभी को भोजन कराया जाता है।
कार्यक्रम का संचालन जत्थेदार भूपेंद्र सिंह जी ने किया। इस अवसर पर भाई अमनदीप सिंह, मनमीत सिंह (पाम ट्री होटल), सरदार अजीत सिंह जुनेजा, सरदार हरदीप सिंह जुनेजा, सरदार परविंदर सिंह, सरदार गुरदीप सिंह जुनेजा (राजू बॉन्ड), डॉ. दिनेश शर्मा (शर्मा ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. अवधेश भारद्वाज (भारद्वाज हॉस्पिटल) और सरदार स्वर्णजीत सिंह (पप्पू डालडा) सहित अन्य गणमान्य लोगों ने गुरुद्वारे में माथा टेका। जत्थेदार भूपेंद्र सिंह ने सभी का सिरोपा और शॉल भेंट कर सम्मान किया।
इस अवसर पर मदन लाल जुनेजा, जसवीर सिंह, गुरमीत सिंह गुलाटी, सुरजीत सिंह गुलाटी, सिदक सिंह बांगा, सरदार राजेंद्र सिंह बांगा, सरबजीत सिंह जुनेजा, जगदीप सिंह जुनेजा, करनदीप सिंह बांगा, हरपाल सिंह राजपाल, सरदार रंजीत सिंह बांगा, सरदार भूपेंद्र सिंह टटेजा और कमलजीत सिंह टटेजा सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।
कार्यक्रम का समापन अरदास के साथ हुआ। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया।



