नर्सिंग पेशे की गरिमा पर सवाल उचित नहीं, नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़: प्रो. फरहा आज़मी

अलीगढ़, 9 जून। हाल ही में अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत द्वारा नर्सिंग पेशे को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य प्रो. फरहा आज़मी ने कहा है कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का प्रतीक है। किसी भी प्रकार की टिप्पणी या धारणा का मूल्यांकन नर्सिंग समुदाय के वास्तविक योगदान और सामाजिक महत्व को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो दिन-रात मरीजों की देखभाल, उपचार प्रक्रिया में सहयोग और मानवीय संवेदनाओं के साथ सेवा प्रदान करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान नर्सों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लाखों लोगों की सेवा की, जिसे पूरा विश्व कभी नहीं भूल सकता।
प्रो. फरहा आज़मी ने कहा कि यदि समाज में नर्सिंग पेशे को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी या पूर्वाग्रह मौजूद है, तो उसे दूर करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। नर्सों की पहचान उनकी वर्दी से नहीं, बल्कि उनके ज्ञान, कौशल, कड़ी मेहनत और सेवा-भाव से होती है।
उन्होंने देश की सभी नर्सों, नर्सिंग छात्रों और शिक्षकों को नमन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में नर्सिंग समुदाय का योगदान अतुलनीय है। समाज में नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान, गरिमा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
प्रो. फरहा आज़मी ने कहा, “नर्स केवल मरीजों की देखभाल करने वाली नहीं होतीं, बल्कि वे जीवन रक्षक, मार्गदर्शक, शिक्षिका और स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उनके योगदान को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए।”
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बहस के माध्यम से समाज में नर्सिंग पेशे के महत्व को लेकर और अधिक जागरूकता पैदा होगी तथा नर्सों के प्रति सम्मान और विश्वास की भावना और मजबूत होगी।



