आजादी की इतिहास में उलेमा और स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियां महत्वपूर्ण: जमीयत उलेमा
अलीगढ़, 15 अगस्त। जमीयत उलेमा जिला अलीगढ़ के तत्वावधान में क्लासिक पैलेस में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से हुआ। मदरसा नादिर उलूम के विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित भाषण और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा जिला अलीगढ़ के कन्वीनर इस्लाह-ए-मुआशरा मुफ्ती सलीम अहमद खान ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और उलेमा व स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने शामली के ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख करते हुए हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की, मौलाना मोहम्मद कासिम नानौतवी, मौलाना रशीद अहमद गंगोही और हाफिज जामिन शहीद के बलिदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी, शाह अब्दुल अजीज मुहद्दिस देहलवी, मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना मोहम्मद हिफ्जुर्रहमान स्योहारवी और मुफ्ती किफायतुल्लाह देहलवी समेत अनेक उलेमा ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों से परिचित कराना हमारी जिम्मेदारी है।
अध्यक्षीय संबोधन में जमीयत उलेमा जिला अलीगढ़ के अध्यक्ष सैयद कारी अब्दुल्ला ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास मुसलमानों, विशेषकर उलेमा के योगदान और बलिदानों के उल्लेख के बिना अधूरा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने पूर्वजों के इतिहास का अध्ययन करने और स्वतंत्रता संग्राम की साझा विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की।
कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल मुताली कासमी, मौलाना मुगीसुर्रहमान, मौलाना अजहरुद्दीन, मुफ्ती नोमान, मुफ्ती मोहम्मद जैद मजाहिरी, मुफ्ती महबूबुर्रहमान, मुफ्ती अमजद, डॉ. शहाब अलवी, मौलाना सनाउल्लाह, कारी मिकाइल, कारी मोहम्मद शाकिर सहित उलेमा, शिक्षक, कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में देश की सुरक्षा, शांति, प्रगति और खुशहाली के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के लिए दुआ की गई।




