अलीगढ़ में सजी साहित्यिक महफ़िल,नीलिमा डालमिया अधर की लेखनी और विचारों पर चर्चा
“राधा: द प्रिंसेस ऑफ बरसाना” समेत उनकी चर्चित किताबों पर हुआ विचार-विमर्श
अलीगढ़, 8 मई (मोहम्मद कामरान)।
प्रभा खेतान फाउंडेशन और एहसास वूमेन ऑफ अलीगढ़ के संयुक्त सहयोग से “द राइट सर्किल” कार्यक्रम शहर के हफ़ीज़ मंजिल, मैरिस रोड में आयोजित हुआ, जिसमें मशहूर लेखिका नीलिमा डालमिया अधर की साहित्यिक जिंदगी, उनकी लोकप्रिय किताबों और सामाजिक विषयों पर आधारित लेखन पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और इंसानी रिश्तों से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर बातचीत हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज़ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य और एएमयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर मौजूद रहे, जबकि संचालन की जिम्मेदारी एहसास अलीगढ़ की जिम्मेदार और शिक्षाविद् डॉ. फ़ाईज़ा अब्बासी ने अपने खास अंदाज़ में निभाई। सवाल-जवाब के पूरे सत्र के दौरान डॉ. फ़ाईज़ा अब्बासी ने लेखिका से बेहद दिलचस्प और गहरे सवाल किए, जिनका जवाब नीलिमा डालमिया ने बेबाकी और संवेदनशीलता के साथ दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में साहित्यकार डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने नीलिमा डालमिया अधर का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी लेखनी में हमेशा गंभीर सामाजिक और इंसानी विषयों को बेहद खूबसूरती से पेश किया है। उन्होंने कहा कि “जब किसी भाषा में लिखी गई गद्य रचना सादगी और ईमानदारी से भरपूर हो, तो उसका असर सीधे पाठकों के दिल तक पहुंचता है।

कार्यक्रम के दौरान नीलिमा डालमिया अधर की मशहूर किताबों “फादर डीयरस्ट”, “मर्चेंट्स ऑफ डेथ”, “द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा” और उनकी हालिया चर्चित पुस्तक “राधा: द प्रिंसेस ऑफ बरसाना” पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
नीलिमा डालमिया अधर ने अपनी नई पुस्तक “राधा: द प्रिंसेस ऑफ बरसाना” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी नहीं, बल्कि स्त्री चेतना, समर्पण और आध्यात्मिक प्रेम की गहराइयों को समझने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि राधा भारतीय सांस्कृतिक चेतना की ऐसी प्रतीक हैं, जिनकी संवेदनाएं आज भी प्रासंगिक हैं।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा ऐसे साहित्यिक कार्यक्रम समाज में भाईचारे, सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक वातावरण को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य लोगों को जोड़ने और समाज को बेहतर दिशा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रोफेसर तारीक मंसूर ने कहा कि नीलिमा डालमिया की यह पुस्तक भारतीय संस्कृति, प्रेम और आध्यात्मिक विरासत को नए अंदाज़ में प्रस्तुत करती है और युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्य से जोड़ने का काम करती है। उन्होंने नीलिमा डालमिया अधर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सभी सवालों के जवाब बेहद बेबाकी से दिए। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने निजी सवालों पर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैं, लेकिन नीलिमा डालमिया ने बेहद सादगी और स्पष्टता के साथ अपने विचार रखे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज़ ने नीलिमा डालमिया की पुस्तकों में प्रस्तुत विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उनकी लेखनी में समाज की जटिलताओं, स्त्री मनोविज्ञान और रिश्तों की विभिन्न परतों को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. फ़ाईज़ा अब्बासी ने पुस्तक के संदर्भ में कहा कि “राधा: द प्रिंसेस ऑफ बरसाना” में आध्यात्मिक प्रेम और स्त्री व्यक्तित्व को जिस संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है, वह आधुनिक पाठकों को भी भीतर तक प्रभावित करता है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि प्रोफेसर तारिक मंसूर ने नीलिमा डालमिया अधर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया, जबकि सभी मेहमानों का नेचर फ्लावर देकर स्वागत और सम्मान किया गया। इस मौके पर शहर के शिक्षाविदों, साहित्य प्रेमियों, शोधार्थियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी हस्तियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।अंत में नीलिमा डालमिया अधर ने अपनी पुस्तक पाठकों को हस्ताक्षर के साथ भेंट की।




