अठखम्बा बाबा शाहजमाल के तीन दिवसीय उर्स का रूहानी माहौल में समापन
मिलाद शरीफ, महफिल-ए-समा और कुल की रस्म में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, ज़ायरीन में बांटा गया खीर का तबर्रुक
अलीगढ़, 8 मई (मोहम्मद कामरान)
हज़रत अठखम्बा बाबा शाहजमाल रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हो गया। उर्स के दौरान दरगाह परिसर पूरी तरह रूहानी माहौल में डूबा नजर आया, जहां शहर समेत दूर-दराज इलाकों से पहुंचे अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर फातिहा पढ़ी और मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी।
उर्स की शुरुआत 5 मई को नमाज़-ए-इशा के बाद आयोजित मिलाद शरीफ से हुई। इस दौरान उलमा-ए-किराम और नातख्वानों ने हुज़ूर-ए-अकरम की शान में खिराज-ए-अकीदत पेश किया। महफिल में मौजूद लोगों ने दरूदो-सलाम पढ़कर रूहानी फैज़ हासिल किया।
उर्स के दूसरे दिन 6 मई को महफिल-ए-समा (कव्वाली) और लंगर का आयोजन किया गया। महफिल-ए-समा में मशहूर कव्वाल गुलाम फरीद और शाहिद बच्चा पार्टी ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। कव्वाली सुनने के लिए देर रात तक अकीदतमंदों की भारी भीड़ मौजूद रही। सूफियाना कलाम पर लोग झूमते नजर आए और दरगाह परिसर “या हुसैन”, “या ग़ौस” और सूफी कलामों से गूंज उठा।

महफिल-ए-समा में सलमान शाहिद बतौर मेहमान-ए-खुसूसी शामिल हुए। उन्होंने उर्स की परंपरा और सूफी सिलसिलों की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और रूहानी आयोजन समाज में भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देते हैं।
उर्स के आखिरी दिन 7 मई को कुल शरीफ पढ़ा गया, जिसके साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन हो गया। कुल की रस्म में बड़ी संख्या में ज़ायरीन मौजूद रहे। इस मौके पर दरगाह में विशेष दुआ का आयोजन किया गया, जिसमें मुल्क की तरक्की, अमन और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।
उर्स के समापन पर सभी ज़ायरीन को खीर का तबर्रुक वितरित किया गया। दरगाह परिसर में लंगर का भी इंतज़ाम किया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर नवेद इकबाल (दरगाह सज्जादे), ताहिर खान (उर्स संरक्षक), वसीम वारसी, मोहम्मद अकील, हाजी नूर मोहम्मद (बर्ची बहादुर दरगाह), इकराम, इमीन समेत सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। आयोजकों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी उर्स पूरी शानो-शौकत और अकीदत के साथ मनाया गया।




