एएमयू और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन ने कैंसर देखभालकर्ताओं पर संयुक्त शोध पूर्ण किया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन (अमेरिका) के बीच कैंसर रोगियों के पारिवारिक देखभालकर्ताओं (केयरगिवर्स) पर किया गया संयुक्त शोध सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह उपलब्धि दोनों संस्थानों के बीच हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) के तहत स्थापित शैक्षणिक सहयोग का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
यह शोध केयरगिविंग बर्डन, क्वालिटी ऑफ लाइफ एंड कॉग्निटिव वल्नरेबिलिटी अमंग फैमिली केयरगिवर्स ऑफ कैंसर पेशेंट्स ए क्रॉस-सेक्शनल स्टडी फ्रॉम इंडिया शीर्षक से किया गया। अध्ययन में कैंसर रोगियों की देखभाल कर रहे 100 पारिवारिक सदस्यों के मानसिक, सामाजिक तथा संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
शोध परियोजना का संयुक्त नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन कॉलेज ऑफ फार्मेसी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. समीना सालिम तथा एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अकरम ने किया।
एएमयू में अध्ययन के क्लीनिकल भाग का संचालन प्रो. मोहम्मद अकरम और डॉ. समरीन जहीर ने किया, जबकि मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की जिम्मेदारी मनोविज्ञान विभाग की डॉ. सारा जावेद ने संभाली। शोध कार्य में जेएनएमसी के छात्र शोधकर्ताओं डॉ. आफरीन खानम, आफरीन कमाल फारूकी, डॉ. आमिर, मोहम्मद आरिम, उज्मा फातिमा, अलीना जैदी, अदीना सुहैल तथा मोहम्मद सुमाम ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन की ओर से डॉ. समीना सालिम, डॉ. फातिन अतरोज़ और प्रो. सुसान अबूघोश शोध दल का हिस्सा रहीं।
यह परियोजना यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल एंगेजमेंट के ग्लोबल फैकल्टी डेवलपमेंट अवॉर्ड के सहयोग से संचालित की
गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से कैंसर रोगियों के देखभालकर्ताओं पर पड़ने वाले मानसिक और सामाजिक बोझ को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी तथा कैंसर देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एएमयू और यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के बीच भविष्य के संयुक्त शोध को नई दिशा मिलेगी।



