जेएन मेडिकल कालिज में दो दिवसीय मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी कार्यशाला का आयोजन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग ने मेरिल लाइफ साइंसेज के सहयोग से दो दिवसीय लाइव मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस)कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में दुर्गापुर, कोलकाता और पटना से आए हृदय शल्य चिकित्सकों एवं उनकी सर्जिकल टीमों ने भाग लिया तथा जेएन मेडिकल कालिज चिकित्सकों से अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर हृदय रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने तथा सर्जरी के परिणामों में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।

प्राचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंजुम परवेज ने कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यशाला जेएनएमसी को उन्नत हृदय शल्य चिकित्सा, चिकित्सकीय प्रशिक्षण और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम संस्थान की नवाचार, चिकित्सा शिक्षा और उच्च स्तरीय विशिष्ट हृदय सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

कार्यशाला के आयोजन अध्यक्ष एवं ऑपरेटिंग फैकल्टी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आजम हसीन ने बताया कि कार्यशाला के दौरान चार मरीजों की जटिल हृदय शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक मिनिमली इनवेसिव तकनीक से की गई। लाइव सर्जरी के माध्यम से प्रतिभागियों को मरीजों के चयन, ऑपरेशन की योजना, शल्य तकनीकों तथा ऑपरेशन से पूर्व एवं पश्चात प्रबंधन की बारीकियों को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला।

डॉ. हसीन ने बताया कि मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी के माध्यम से पारंपरिक स्टर्नोटॉमी (छाती की हड्डी को पूरी तरह खोलने) के बजाय छोटे चीरे लगाकर जटिल हृदय ऑपरेशन किए जाते हैं, जिससे मरीजों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अनेक सिद्ध लाभ होने के बावजूद यह अत्यधिक विशेषज्ञता वाली तकनीक है और भारत में अभी सीमित संख्या में ही हृदय शल्य चिकित्सक नियमित रूप से इस प्रकार की सर्जरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल मरीजों को विश्वस्तरीय हृदय चिकित्सा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हृदय शल्य चिकित्सकों को इन आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित और मार्गदर्शित करना भी है। मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी भविष्य की शल्य चिकित्सा है और इस प्रकार की कार्यशालाएं ज्ञान एवं व्यावहारिक चिकित्सा के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के आयोजन सचिव एवं ऑपरेटिंग फैकल्टी डॉ. सैयद शमायल रब्बानी ने बताया कि कार्यक्रम में लाइव ऑपरेटिव डेमोंस्ट्रेशन तथा संवादात्मक शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए, जिनसे प्रतिभागियों को मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी की तकनीकी जटिलताओं तथा चिकित्सकीय निर्णय प्रक्रिया को गहराई से समझने का अवसर मिला।

चारों सर्जरियों में एनेस्थीसिया संबंधी सेवाएं डॉ. दीप्ति चन्ना एवं डॉ. कुलसुम आलम ने प्रदान कीं, जबकि डॉ. साबिर अली खान एवं इरशाद कुरैशी ने परफ्यूजनिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं दीं। ऑपरेशन थिएटर टीम में सलमान, असलम एवं कमरान तथा ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल करने वाली टीम में सुहैल, नदीम, रिंकू, कैलाश, इमरान, रीनू एवं आमिर ने कार्यशाला के दौरान मरीजों के निर्बाध एवं सफल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने इसके व्यावहारिक स्वरूप, विस्तृत लाइव सर्जिकल प्रदर्शन तथा खुली शैक्षणिक चर्चाओं की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

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