डीआरटी इलाहाबाद ने कैनरा बैंक को नोटिस सेवा का प्रमाण प्रस्तुत करने का दिया निर्देश

अलीगढ़/इलाहाबाद। ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) इलाहाबाद में महविश खान बनाम कैनरा बैंक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह यह प्रमाण प्रस्तुत करे कि आवेदिका के दिल्ली स्थित पते पर नोटिस भेजे गए थे या नहीं।

मामले की सुनवाई 2 जून 2026 को हुई, जिसमें आवेदिका की ओर से अधिवक्ता सैयद अली मुर्तज़ा तथा बैंक की ओर से अधिवक्ता ए.के. पाल उपस्थित रहे। नीलामी क्रेता की ओर से अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिस पर न्यायाधिकरण ने चार सप्ताह का समय प्रदान किया।

सुनवाई के दौरान आवेदिका की ओर से बताया गया कि वह वर्ष 2018 से दिल्ली में रह रही हैं और वर्ष 2022 में बैंक को अपने बदले हुए पते की सूचना भी दे चुकी हैं। साथ ही उनके और उनके पति के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा भी लंबित है। इसके बावजूद दिल्ली के पते पर कोई नोटिस तामील नहीं किया गया।

इस पर न्यायाधिकरण ने कैनरा बैंक को निर्देश दिया कि वह दिल्ली के पते पर नोटिस भेजे जाने का प्रमाण रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे। आवेदिका को भी बैंक के जवाब पर विस्तृत प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

न्यायाधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 निर्धारित की है। तब तक बैंक को किसी भी प्रकार की कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई (Coercive Steps) करने से रोक दिया गया है तथा पूर्व में पारित अंतरिम आदेश यथावत लागू रहेंगे।

यह आदेश डीआरटी के पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता द्वारा पारित किया गया।

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