बिना चीरा लगाए एंडोस्कोपिक सर्जरी से 12 वर्षीय शिवांग को मिला नया जीवन
अलीगढ़, 18 जुलाई (मोहम्मद कामरान)। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज (नई दिल्ली) के चिकित्सकों ने अलीगढ़ के 12 वर्षीय शिवांग शर्मा की खोपड़ी के निचले हिस्से (स्कल बेस) में मौजूद जन्मजात दुर्लभ दोष का बिना किसी बाहरी चीरे के आधुनिक एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल सर्जरी के माध्यम से सफल उपचार किया। इस जन्मजात समस्या के कारण शिवांग बार-बार बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर संक्रमण का शिकार हो रहा था।
अस्पताल के अनुसार, पिछले एक वर्ष में शिवांग को कई बार मेनिन्जाइटिस हुआ। एक बार संक्रमण इतना गंभीर हो गया कि उसे सेप्टिक शॉक और दौरे भी पड़े। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि उसकी नाक से समय-समय पर साफ तरल पदार्थ निकल रहा था, जो मस्तिष्क के तरल (सीएसएफ) के रिसाव का संकेत था।
विस्तृत जांच में पता चला कि खोपड़ी की हड्डी में जन्मजात छेद होने के कारण मस्तिष्क की झिल्ली बाहर की ओर उभर आई थी और सीएसएफ नाक के रास्ते बाहर निकल रहा था। इससे बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ गया था।
मैक्स हॉस्पिटल की न्यूरोसर्जरी एवं ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने डॉ. अमित कुमार गर्ग और डॉ. अमिताभ गोयल के नेतृत्व में एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल सर्जरी कर इस दोष को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। सर्जरी के दौरान सीएसएफ के रिसाव को पूरी तरह बंद कर दिया गया।
डॉ. अमिताभ गोयल ने कहा कि यदि किसी बच्चे को बार-बार मेनिन्जाइटिस हो रहा हो तो केवल दवाओं से इलाज पर्याप्त नहीं है, बल्कि जन्मजात शारीरिक असामान्यताओं की भी जांच आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान और आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी से ऐसे मरीजों को गंभीर जटिलताओं और स्थायी मस्तिष्क क्षति से बचाया जा सकता है।
सर्जरी के बाद शिवांग की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। नाक से सीएसएफ का रिसाव पूरी तरह बंद हो गया और ऑपरेशन के चौथे दिन उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों ने नियमित फॉलो-अप जारी रखने की सलाह दी।




